उसे कैसे माफ कर दूं – कमलेश आहूजा   : Moral Stories in Hindi

“मम्मी,बुआ रोज रोज मुझे फोन करके बोलती है,कि आप उसे माफ कर दें और पहले की तरह दोनों परिवार एक हो जाते हैं।आप बुआ को माफ करदो ना..माफ करने वाले का दिल बहुत बड़ा होता है।”रोहित दुखी होते हुए बोला। “काश! माफ कर पाती..!! पर क्या करूँ जब भी तेरी बुआ की बातें उसका व्यवहार … Read more

तूलिका – भगवती सक्सेना गौड़   : Moral Stories in Hindi

तूलिका ने जैसे ही फेसबुक खोला, फिर वही महाशय जी का  फ्रेंड रिक्वेस्ट देखकर परेशान हो गयी। एक महीने से वो नजरअंदाज कर रही थी, पर वो शख्स मानने को तैयार ही नही थे। आखिर उसने सोचा चलो, एक दिन के लिए उसकी बात मान लेती हूँ, क्या कहना चाहता है, फिर ब्लॉक कर दूंगी। … Read more

मेरा लल्ला सिर्फ मेरा है – श्वेता अग्रवाल   : Moral Stories in Hindi

मीतू हॉस्पिटल के बेड पर लेटी अपने बच्चे के गोद में आने का इंतजार कर रही थी।आज अचानक ही ऑफिस में उसके पेट में तेज दर्द उठने के कारण उसकी प्रीमेच्योर डिलीवरी करानी पड़ी थी। कमजोर होने के कारण बच्चा डॉक्टरों की निगरानी में था जिसे वह दूर से निहार तो सकती थी लेकिन गोद … Read more

मनमुटाव – शनाया अहम   : Moral Stories in Hindi

निकिता और राज की शादी बहुत धूमधाम से सम्पन्न हुई , निकिता दुल्हन बनकर ससुराल आ गई , ससुराल में निकिता का भव्य स्वागत किया गया।  निकिता की खूबसूरती के चर्चे हर कोई कर रहा था , राज अपनी बीवी की तारीफ़ सुन फुले नहीं समां रहा था।  निकिता की ससुराल में सास ससुर नहीं … Read more

विश्वास की डोर – करुणा मलिक   : Moral Stories in Hindi

रुक्मिणी  अनमनी सी बैठी सब्ज़ी काट रही थी । चालीस साल हो गए विवाह को पर न तो दोनों पति- पत्नी के विचार मिलते थे न पसंद- नापसंद और न ही घरेलू वातावरण ।  “ अक़्ल नाम की चीज नहीं औरत में , परदे लगाकर पूरे घर में अंधेरा कर दिया । प्रकाश कहाँ से … Read more

मनमुटाव – पूजा गीत   : Moral Stories in Hindi

मैं, (मैत्री) चाय की गुमटी में अपने पति निखिल और बेटी सजल के साथ चाय पी रही थी कि अचानक एक आवाज ने  मुझे चौंका दिया. पीछे मुड़कर देखा तो कुछ जाना-पहचाना-सा चेहरा दिखा. पर याद नहीं आ रहा था कहाँ देखा, कौन है ये! वो आदमी भी मैत्री को देखे जा रहा था कि … Read more

किरायेदार – अभिलाषा कक्कड़  : Moral Stories in Hindi

रश्मि सुबह दाना छत पर डालने गई तो उसे सामने की छत पर बने दो कमरों के मकान में हलचल सी महसूस हुई जो कि काफ़ी दिनों से ख़ाली था । घर के सामने पाँच लोगों का परिवार रहता था । मुखिया कांशीराम छोटी सी किराने की दुकान से अपने परिवार का भरण पोषण करता … Read more

मायके के लिए अपने फर्ज कैसे भूल जाऊँ? – रश्मि प्रकाश  : Moral Stories in Hindi

“ अरे बेटा तू अचानक यहाँ आ गई.. सब ख़ैरियत तो है?” दरवाज़े की घंटी बजते दरवाज़े पर राशि को यूँ अचानक आया देख सुमिता जी बोलीं. “हाँ माँ तुम तो जानती हो मैं बहुत जल्दी घबरा जाती हूँ दो तीन दिन से बड़े बुरे सपने देख रही थी तो सोचा आकर तुम सब से … Read more

मनमुटाव – आरती झा आद्या  : Moral Stories in Hindi

शांतिनगर कॉलोनी में, एक खूबसूरत सुबह के साथ हरियाली भरी थी। यहाँ रमेश और सुरेश नाम के दो पड़ोसी खुशहाली और सद्भाव के साथ रहते थे। उनके घर एक-दूसरे के बगीचे के साथ जुड़े थे और और उनके बीच एक छोटी सी बाड़ थी। उनकी दोस्ती का वातावरण पूरे कॉलोनी में प्रशंसित था। लेकिन एक … Read more

दोनों ही ज़िद्दी हैं – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

    ” मालकिन…ये देखिये…अंशुल भईया का अखबार में फोटू छपा है और उनके बारे में भी कुछ अच्छा लिखा है।” घर का ड्राइवर सुशील उमा जी को अखबार दिखाते हुए बोला।   ” ला…दिखा तो…।” बेटे का नाम सुनकर वो चहक उठी थीं।अखबार लेकर उन्होंने पास बैठे अपने पति रमाकांत जी को बेटे की तस्वीर दिखानी चाही … Read more

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