“इश्क ” एक गुनाह (भाग-3) – रचना कंडवाल : Moral stories in hindi

उसने लड़की के बारे में कुछ भी पूछने की जरूरत नहीं समझी। लालची गंवार लोग राणा खानदान से रिश्ता जोड़ कर सोसायटी में अपनी हैसियत ऊंची करने का सपना देख रहे हैं। दोपहर साढ़े बारह बजे वो लोग पहुंचे तो कुलवीर चौधरी ने उनका वेलकम किया। लंबे चौड़े शानदार व्यक्तित्व के शख्स रौबदार चेहरा तराशी … Read more

“इश्क ” एक गुनाह (भाग-2) – रचना कंडवाल : Moral stories in hindi

मानवेंद्र सिंह उसका जवाब जानते थे उन्होंने थके हुए स्वर में कहा। ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी उन्होंने गहरी सांस ली। तुम कल ही वापस लौट जाओ। दोबारा यहां कभी मत आना। उन्होंने मुंह फेर लिया। बाबा प्लीज ऐसा मत कीजिए उसने आगे बढ़ कर उन्हें गले से लगा लिया। वीर! शायद तुम नहीं जानते … Read more

“इश्क ” एक गुनाह (भाग-1) – रचना कंडवाल : Moral stories in hindi

सुबह का वक्त हवेलियों के शहर बीकानेर में विशाल पुश्तैनी हवेली की छत पर खड़ा एक नौजवान उगते हुए सूरज को देख रहा है। तभी पीछे से आवाज आई   “हुक्म सा” उसने बिना पीछे मुड़े  कोल्ड वायस में कहा, कहो “फूलचंद” बड़े सरकार आपको बुला रहे हैं।  तुम चलो मैं आता हूं वो पीछे … Read more

“सासूजी मैंने मान लिया कि बहू कभी बेटी नहीं बन सकती” – सिनी पांडे : Moral Stories in Hindi

मुस्कान अपने माता पिता की सबसे छोटी बेटी थी।देखने मे सुंदर,गोरा रंग,शर्मीला स्वभाव,संस्कारी आचरण-उसके व्यक्तित्व को आकर्षक बनाते थे। मुसकान का संयुक्त परिवार था।उसके पिता का बड़ा व्यवसाय था तो उसके लालन पालन में कोई कमी नही रखी गयी थी। घर में सबकी लाडली थी वो। अपने दादी बाबा की चहेती,माँ की जान,चाचा चाची की … Read more

बेटी की बेटी बनाम बेटे की बेटी – पूनम बगाई : Moral Stories in Hindi

“नीना शाम को 4 से 6  सप्तमी वाले दिन मेरे यहाँ चौकी है। जरूर आना।” सीमा जी ने नीना को मुस्कुरा कर कहा।  “क्या बात सप्तमी पर तुम करवा रही हो अब की बार”। नीना जी, जो कि एक नंबर की गपोड़ी और सीमा जी की अच्छी दोस्त भी थी ने सीमा जी को रोकते … Read more

फ़ोन की बजती घंटी…. – पूनम बगाई : Moral Stories in Hindi

मोबाइल साइलेंट पर था पर फिर भी उस पर होने वाली घर्र घर्र सुषमा जी के कानो में साफ़ सुनाई दे रही थी जिसे वे चाय के घूँट के बीच अनदेखा करने की भरपूर कोशिश कर रही थी। वे जानती थी ये फ़ोन समीर यानी कि उनके बेटे का है।  मोबाइल की घर्र घर्र की … Read more

मासी नहीं मम्मा… – रश्मि झा मिश्रा : Moral Stories in Hindi

…”कुहू… ना मेरी गुड़िया… वहां मत जा…!” ” मम्मा जाना…!” ” नहीं बेटा… अभी नहीं…!” ” नहीं… मम्मा जाना…!”  कुहू एक ही रट लगाए बैठी थी…  पर मम्मा जाने के लिए… मां को होना भी तो चाहिए…  सुमन ने खींचकर उसे सीने से लगा लिया… ” मैं हूं ना बेटा… मासी… मैं ही तेरी मम्मा … Read more

अतृप्त आत्मा – सरिता अजय जी साकल्ले : Moral Stories in Hindi

दुबे जी का पूरा जीवन संघर्ष मैं गुजरा जन्म के 3 साल बाद ही मां के आंचल से वंचित रहे। मां का देहांत हुआ पिता द्वारा लालन-पालन किया गया। थोड़ी सी खेती बाड़ी थी पिता दिन रात मेहनत कर अपना और अपने पुत्र का जीवन यापन करते थे। इसी के चलते शिक्षा प्राप्त की और … Read more

कद्र – अर्चना सिंह : Moral Stories in Hindi

अपना जीवन मैंने हमेशा दूसरों के लिए जिया है । स्वभाव अच्छा होते हुए भी न जाने मुझे शायद हर वक़्त अच्छा सुनने की आदत  या यूँ कहें लत लग गयी थी । नाती – नातिन, पोते – पोतियों से भरा घर, बेटी- बहुएँ, जेठानी – देवरानी । कहने को घर में अथाह लोग लेकिन मेरा … Read more

प्यारा बचपन – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

    आज पढ़ाते- पढ़ाते अचानक जोवैन(मेरी छात्रा) ने मुझे एक्सक्यूज़ मी मैम कहा और दूसरे कमरे में चली गई।वापस आई तो मुझे आँखें बंद करने को कहा और फिर “ओपेन मैम” कहकर मेज़ पर एक बड़ी-सी डाॅल रखकर बोली,” Mam..see, my uncle gifted me.” फिर वह उस डाॅल की खूबियाँ बताने लगी और तब मुझे मेरा … Read more

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