पूर्णमासी की रजनी – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

अरे तेजू ये क्या तेरी बिटिया है?       हां, बाबूजी मैं बापू की बिटिया ही हूँ।बापू आज घर पर ही खाने का टिफिन भूल बआये थे,इसीलिए मैं टिफिन ले आयी।      अच्छा किया बेटा।तुम तो पढ़ी लिखी लगती हो?      हां,बाबूजी पढ़ी लिखी तो हूँ,इंटर पास किया है,मैंने, आगे भी पढ़ना चाहती थी,पर पढ़ न सकी,बी.ए. प्राईवेट करूँगी। … Read more

संयुक्त परिवार का प्यार – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

बेटा मेरा टिकट करवा दें मुझे अपने घर जाना है गोपाल जी बोले , अपना घर अब यही अपना घर है बाबूजी अखिल बोला किस घर जाने की बात कर रहे हो जहां आपका कुछ नहीं है ।न कोई अपना कहने को ।घर में बस न का  हिस्सा है बस कहने को दो छोटे छोटे … Read more

सब कुछ मंजूर है लेकिन बहू को रोटियां बनाकर नहीं खिला सकती…. – सविता गोयल : Moral Stories in Hindi

” पता नहीं किस जन्म की दुश्मनी निकाल रही हैं मुझसे…… ऐसी छुई- मुई बनकर बैठी रहती हैं जैसे मेरे आने से पहले आठ- दस नौकर- चाकर आगे – पीछे फिरते रहते थे। थोड़ा बहुत हाथ- पैर हिलाने से कौन सा शरीर घिस जाएगा इनका ….. सब कुछ मेरे भरोसे छोड़ कर बैठ जाएंगी ….. … Read more

छोटी बहू या ज़िम्मेदारियों की पोटली – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

“ बेटा तू अब तक तैयार नहीं हुई…लड़की वाले तिलक करने आ गए.. सब तुम्हें खोज रहे हैं…. और तुम यहाँ सामानों के बीच में उलझी पड़ी हो।“ सुमिता जी ने बेटी से कहा जो स्टोर में सासु माँ के कहने पर पूजा के लिए परात और ना जानें क्या क्या सामान खोजने में व्यस्त … Read more

रिटायरमेंट…. उम्र का या मन का.. – संगीता त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

  विनीत आज रिटायर हो रहे… सुबह सुबह जल्दी उठ कर तैयार हो गए …. कुछ अजीब सा अहसास हो रहा… खुशी मनाये या दुख… ऑफिस के संगी -साथी छूट रहे… वो ग्यारह और चार बजे की चाय के संग कुछ फिकरे बाजी …. अब कहाँ ये सब…. भारी मन से नाश्ता कर…. ऑफिस रवाना हो … Read more

सौभाग्यवती – हेमलता गुप्ता : Moral Stories in Hindi

संध्या बेटा.. अभी थोड़ी देर तुम कमरे में ही रहना तेरी भाभी देहरी पूज कर अपने भाई के साथ भाई की शादी में जा रही है मैं नहीं चाहती उस समय तुम सामने आओ, तुम्हें तो पता है ना ऐसे शुभ मौके पर तुम्हारा आना अब उचित नहीं है हालांकि यह बात कहते हुए मां … Read more

कहां मर गई…? – रोनिता कुंडु : Moral Stories in Hindi

अरे बहू… कहां मर गई..? कब से चाय के लिए चिल्ला रही हूं… देती क्यों नहीं..? सुलोचना जी ने अपनी बहू राधिका से कहा…  राधिका:   मम्मी जी..! इनका नाश्ता बना रही हूं… यह हो जाए फिर बनाती हूं आपकी चाय, वरना इनको देर हो जाएगी  सुलोचना जी:   हां सुबह देर से जागेगी, तो … Read more

धुंधली पड़ती शाम (भाग-4) (अंतिम भाग) – पूनम बगाई : Moral stories in hindi

रोहन ने एक गहरी सांस ली और निशा की तरफ देखा, जैसे वो इस पल में हर शब्द सोच-समझ कर बोलना चाहता हो। उसकी आँखों में पश्चाताप का सागर था। हाथ जोड़कर उसने कहा, “निशा, मैं जानता हूँ, मैंने तुम्हें और अभी को बहुत तकलीफ़ दी है। मैंने तब साथ नहीं दिया जब सबसे ज़्यादा … Read more

धुंधली पड़ती शाम (भाग-3) – पूनम बगाई : Moral stories in hindi

तलाक की अंतिम तारीख नज़दीक थी। पांच साल गुज़र चुके थे, लेकिन इन सालों में निशा और रोहन दोनों ही ज़िंदगी के एक अनकहे दर्द से जूझ रहे थे। रोहन ने वकालत में खूब नाम कमाया था, वह अब आत्मनिर्भर हो चुका था। हर तरफ तारीफें बटोरने के बावजूद, उसके दिल में एक खालीपन हमेशा … Read more

धुंधली पड़ती शाम (भाग-2) – पूनम बगाई : Moral stories in hindi

निशा भारी मन से अपने मायके पहुंची। दरवाजे पर खड़े उसके पिता, श्री शर्मा, पहले से ही समझ गए थे कि कुछ गलत हुआ है। निशा की आंखों में सैलाब छिपा था, लेकिन चेहरा दृढ़ता से भरा था। घर में दाखिल होते ही उसकी आँखों से आंसू फूट पड़े। वह अपने पिता के गले लग … Read more

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