निर्णय – श्वेता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

शाम का समय था, आकाश में डूबते सूरज की नारंगी छटा बिखरी हुई थी। मंदिर के बाहर, लोग हाथ में पूजा और चढ़ावे की थाल लिए सरोज देवी की पूजा समाप्त होने का इंतजार कर रहे थे। सरोज देवी, 55 वर्षीय महिला, माथे पर बड़ी सी लाल बिंदी, माॅंग में सिंदूर की लंबी लाल रेखा … Read more

“अपनापन” – मनीषा सिंह : Moral Stories in Hindi

कालिंदी काकी की टोकरी लाल, नीली, पीली, आसमानी और हरी चूड़ियों से भारी पड़ी थी और  जल्दी-जल्दी  सर पर टोकरी रख वह कहीं जा रही थीं कि–  तभी एक आवाज आई–  अरे काकी—-कहां भागी जा रही हो—? हमें नहीं पहनाओगी चूड़ियां–!   देखी तो वैजयंती उनके पीछे-पीछे भागे आ रही थी ।  अरे बिटिया– अभी मैं … Read more

बाबूजी की हिम्मत को सलाम – नेकराम : Moral Stories in Hindi

दिल्ली के जमनापार में हमारा एक छोटा सा घर था पढ़ाई पूरी होने के बाद पिताजी ने मुझे जहांगीरपुरी के एक कारखाने में लगा दिया था  पिताजी भी उसी कारखाने में काम किया करते थे उन्हीं दिनों पिताजी ने एक पुरानी स्कूटी खरीद ली थी उसी स्कूटी पर कारखाने जाते हुए मुझे बाबूजी के साथ … Read more

अपनों का साथ – सरोज सिंह : Moral Stories in Hindi

      हमने पूछ ही लिया आप  कठोर होकर इतने सहज कैसे हैं?बहुत दिनों तक तक बस ओ (राम)हमारी बातों को टालते रहे या यूं कह सकते हैं कि अनदेखा करते रहे पर उन्हें देखकर और सुनकर लगता था कुछ तो है जो छुपा हुआ है।हमारा फेवरेट सब्जेक्ट psychology था सो थोड़ा लोगों की भावनाओं को समझता … Read more

“अपने तो अपने होते हैं” – कुमुद मोहन : Moral Stories in Hindi

“उमा! सुनो ग्रीन लेबल टी तो मंगा ली ना, जीजी वही पीती हैं!” “क्यूँ परेशान हो रहे हो? मैंने जीजी की पसंद की हर चीज़ जो जो तुमने बताई सब मंगा ली हैं” उमा ने हंसते हुए विजय से कहा? विजय की बड़ी बहन आज बरसों बाद एक हफ़्ते के लिए रहने को आ रही … Read more

तूफानों से उबरना – *पूनम भटनागर। : Moral Stories in Hindi

बड़ी ही सराहा रात्रि थी। निमेष अंधेरे में बैठा ये सोच रहा था कि आखिर वह करें तो क्या करें।सब कुछ तबाह होने के बाद किस तरफ का रूख करें। क्या नहीं था उसके पास , एक हंसता-खेलता परिवार। अच्छी नौकरी, घर परिवार । पर न जाने किस की नजर लग गई। उसके आफिस में … Read more

सीधे साधे बिटवा का मुंहफट बहुरिया – सविता गोयल : Moral Stories in Hindi

” हे भगवान, जरा देखो तो कैसे कतर कतर जुबान चल रही है… !! हमारा बिटवा तो बिलकुल गाय है गाय.. और बहू को तो देखो । ,, लेकिन अम्मा. , गाय तो बहु बेटियों को कहते हैं.. भईया तो लड़के हैं ना !! ,, ” चुप कर निगोड़ी…. लगता है तुझपे भी इस बहु … Read more

बहू ये लड्डू भेजें है तेरी माँ ने – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

” बहू ये तेरी माँ ने क्या भिजवाया है तेरे साथ… लड्डुओं का डिब्बा तो इनमें से एक भी नहीं है…माँ बेटी दोनों झूठ बोलने में माहिर हैं… कैसे कह रही थी तेरी माँ समधन जी यहाँ के खालिस घी के मावा लड्डू बनवा कर भिजवा रहे हैं बेटी के साथ आपको जहाँ बाँटना हो … Read more

क्यों माँ का मायका, माँ का ही रह जाता… – संगीता त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

   दादा जी पूजा ख़त्म हो तो इधर आइये, हम, आप और पापा तीनों की एक सेल्फी तो बनती हैं..। कह अवि दादा जी के साथ सेल्फी लेने लगा..। आज दिवाली हैं… सब लोग पूजा करने के बाद फोटो लेने लगे.। दादा जी के साथ मग्न, अवि को देख आज संध्या को अपने पिता की … Read more

*उलझन* – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

      अरे रमेश इतने दिन बाद दिखाई दिये हो,कहाँ थे?        सुरेश तुम,वास्तव में भाई काफी दिनों में मुलाकात हुई है।असल  मे भाई मैं बेटे के पास  विदेश चला गया था।इसी कारण मुलाकात नही हो पायी थी।खैर अब मिलते रहेंगे।        रमेश और सुरेश बचपन के मित्र थे।रमेश के एक बेटा था जो अमेरिका में जॉब कर रहा … Read more

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