अपनों का सहारा – पुष्पा पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

प्रन्द्रह साल बाद जेल में बीताने के बाद कांता जब घर लौटी तो सभी अपरिचित ही लगे। भाई जेल से लेकर आया तो भाभी को पसंद नहीं आया। ” अरे! इन्हें इनके ससुराल में छोड़ना था न। इतना बड़ा घर है, प्रोपर्टी है, इन्हें अब वहाँ  हक से अपने बेटे के साथ रहना था।” “हाँ … Read more

पांच गज की साड़ी – संध्या त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

अब सीखूंगी मम्मी जी साड़ी पहनना…. मुझे भी साड़ी पहनना पसंद है ….! पता नहीं  “अब ” वो “कब” आएगा …..और चीज़े सीखने में तो बिल्कुल समय नहीं लगता…. बल्कि हमें पता भी नहीं चलता और बच्चे माहिर हो जाते हैं ….l           हम तो जैसे माँ के पेट से ही सीख कर आए थे साड़ी … Read more

*दूल्हा पसंद** – श्याम कुंवर भारती : Moral Stories in Hindi

रंजीता को देखने के लिए लड़के वाले आए हुए थे। आकाश और उसके छोटे भाई विजय को लेकर उसके माता पिता  लड़की देखने आए थे। आकाश बड़ा लड़का था उसकी नौकरी एक सरकारी कंपनी में हो गई थी ।छोटा लड़का विजय अभी एमबीए फाइनल इयर में था । वह देखने में बड़ा स्मार्ट लड़का था … Read more

गंतव्य की ओर बढ़ते कदम – शिव कुमारी शुक्ला : Moral Stories in Hindi

शालिनी  बैठी  सोच रही थी कि कबतक मैं इसी तरह मार खाती रहूंगी। कब तक सहन करूं ।आज पीटने की इन्तहा हो गई करीब एक घंटे तक लात-घूंसे बरसाता रहा। फिर भी मन नहीं भरा तो बेल्ट उठा ली। अब शरीर मार खा खा कर थक चुका है। और शक्ती नहीं रही यदि इसी तरह … Read more

Top Ten Shorts Story in Hindi – हिन्दी लघुकथा

भरोसा – अमिता कुचया रेवती हमेशा सेवा करती पर उसकी सास सावित्रीजी अपनी अलमारी की चाबी हमेशा अपनी तकिया के नीचे रखती। पर जब अस्पताल थी, तो बेटी को फोन कर बताती है कि भंडरिया के आखिरी डिब्बे में अलमारी की चाबी है, क्योंकि बाबूजी घर में वो पैसे लेने गये है। तभी बेटा वही … Read more

निर्णय तो लेना पड़ेगा आत्मसम्मान खोकर कब तक जियोगी? – नीलम शर्मा : Moral Stories in Hindi

सपना ओ सपना मालती जी  गुस्से में रसोई से बाहर निकली। ये इतना सारा खाना क्यों बनाया है और ये दो-दो सब्जी बनाने की क्या जरूरत थी। जब देखो बस बेकार में खर्च करने में लगी रहती है कमाई तो मेरे बेटे की है,   कमाकर खर्च करना पड़ता तो पता भी चलता।  अब सपना … Read more

आप मेरी दादी हो! – प्रीति आनंद अस्थाना : Moral Stories in Hindi

“अरे वाह दादी, आपने तो मुझे घर की याद दिला दी!” प्रणय ने खुशी से दादी को गोद में उठा लिया। छोटे से शहर कानपुर का रहने वाला प्रणय मुंबई आया था एम.बी.ए. करने। साथ में तीन सहपाठी और थे। होस्टल न मिलने पर उन्होंने दो कमरे का एक मकान किराए पर लिया था। प्लान … Read more

चल खुसरो घर आपने – नरेश वर्मा : Moral Stories in Hindi

अमेरिका-डलास के उपनगर इरविंग का रोडियो पार्क।जनवरी का महीना।तीन डिग्री सेल्सियस तापमान ।तेज हवा के झोंके शरीर में नश्तर की तरह चुभ रहे हैं ।सीमेन्टेड शेड पर पड़ी बेंच पर बैठे वह पार्क के सूने रास्तों को निहार रहे हैं ।पत्ते विहीन सूनी शाख़ों वाले धुंध में निस्तब्ध खड़े वृक्ष उन्हें हमजोली से लग रहे … Read more

वो फरिश्ता – रेणु गुप्ता : Moral Stories in Hindi

“अंकल, आपने आज राखी क्यों नहीं बांधी? देखिये, मैंने कितनी सारी राखियां बाँधीं हैं। ये अनु  दीदी की, ये तनु  दीदी की, वो ना अंकल, दिल्ली में रहती हैं। और अब मेरी छोटी बहन भी मुझे  राखी बांधेगी। भगवानजी  ने मुझे एक छोटी बहना का गिफ्ट दिया है आज,” मेरे पाँच वर्षीय बेटे किंशुक ने … Read more

मजाक – श्याम आठले : Moral Stories in Hindi

“देखिये, दहेज के हम सख्त खिलाफ हैं। शादी तो आप अच्छी करेंगे ही।हमारी तरफ के लगभग दोसौ बराती रहेंगे। आप अपनी बेटी को पंद्रह तोले सोना दें। बाकी जो अपने दमाद को आप देना चाहें आपकी मर्जी।” विकास के पापा जगत नारायण जी बोले। “—————” ममता के पापा त्रिभुवन जी की तरफ से कोई जवाब … Read more

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