अपनो का साथ – सरोज सिंह : Moral Stories in Hindi

        हमने पूछ ही लिया आप  कठोर होकर इतने सहज कैसे हैं?बहुत दिनों तक तक बस ओ (राम)हमारी बातों को टालते रहे या यूं कह सकते हैं कि अनदेखा करते रहे पर उन्हें देखकर और सुनकर लगता था कुछ तो है जो छुपा हुआ है।हमारा फेवरेट सब्जेक्ट psychology था सो थोड़ा लोगों की भावनाओं को समझता … Read more

अपनो का साथ – उमा वर्मा : Moral Stories in Hindi

।मैं निर्मला ।पर मेरे स्वभाव में निर्मलता बिलकुल नहीं है ।न जाने क्या सोच कर माता पिता ने यह नाम रखा था ।चार भाई बहन में सबसे छोटी थी।इसलिए सभी का प्यार कुछ अधिक ही मिला ।जिसके फलस्वरूप मै जिद्दी, घमंडी बन गई थी ।सुन्दरता में भी बीस रही तो अपने आगे किसी को नहीं … Read more

सिर्फ बहु से बेटी बनने की उम्मीद क्यों? – पारुल रावत : Moral Stories in Hindi

पारुल एक मध्यमवर्गीय परिवार से एक कुशल ग्रहणी थी। उसकी शादी 18 वर्ष पहले राजेश से हुई थी। जो मारुति की ऑथोरिएस्ड डिलरशिप में हेड ऑफ द ब्रांच के पद पर कार्यरत था। दो बेटे थे। घर में एक सास थी। कुल मिला के सब ठीक ठाक ही था।  बस उसकी सास का रवैया उसके … Read more

“कसूर ” – लक्ष्मी गौर : Moral Stories in Hindi

“बता किसका बच्चा है, मेरा बेटा तो छह महीने से घर आया नहीं, मायके मे कहा  से मुँह काला करवा कर आयी है ” यह शब्द मेरी दादी के थे, जो अपनी बहु से कह रही थी.मेरे चाचा जी आर्मी मे थे, पहले आर्मी वालो को छह महीने मे ही छुट्टी मिलती थी , और … Read more

अपनों का साथ – राशि पांडे : Moral Stories in Hindi

क्या करती हो तुम? पूरे दिन चिकचिक लगाई रहती हो | बच्चो को भी  पूरा दिन बोलती रहती हो | मुझे लेट हो रहा है , ऑफिस जल्दी जाना है आज मुझे, इतना बोलते हुए पति देव जी ऑफिस चले जाए | मैं आराम से बैठी, चाय पिया | तब जा के आराम मिला | … Read more

अपनों का साथ – उषा बूचा : Moral Stories in Hindi

 रमेश जी का बेटा , विनय अच्छे से कारोबार सम्भाल रहा था पर पता नहीं किस दोस्त की दोस्ती रंग लाई , कि विनय क्रिकेट मैच के सट्टे खेलने लगा , पहले थोड़ा जीतने पर लालच बढ़ गया और हारता गया ! कितने दोस्तों से रूपए भी उठा लिए ! रमेश जी का ध्यान गया … Read more

सच सामने आ ही जाता है – नेकराम : Moral Stories in Hindi

रात के 10:00 बज चुके थे अस्पताल से छुट्टी होने के बाद मैं जल्दी-जल्दी तेज कदमों से बस स्टैंड की तरफ चल पड़ा सर्दी का मौसम था और ठंडी ठंडी तेज हवाएं भी चल रही थी वहां खड़े एक ऑटो ड्राइवर ने बताया भाई साहब आज यहां बस नहीं आएगी क्यों बेकार में खड़े हो … Read more

जिम्मेदार कौन – श्वेता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

रिद्धि आज स्कूल से आई तो बहुत उदास और गुमसुम सी थी। न तो रोज की तरह आते ही मम्मी भूख लगी है का शोर मचाया और न ही मम्मी के गले मे बाहें डालकर झूमी। चुपचाप स्कूल ड्रेस चेंज कर खाना खाने लगी। न कोई उठापटक, न कोई शोर-शराबा। रोज जिसकी बातें खत्म होने … Read more

अपनों का साथ – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

बबिता  ! सुमन का फ़ोन आया था ।कनिका के लिए लड़का बता  रही थी…. रहने दो, जैसी मिडिल क्लास खुद है तुम्हारी बहन वैसा ही मिडिल क्लास लड़का बताया होगा । अब क्या हम सुमन का बताया रिश्ता देखने चल पड़े ? इतना अभिमान अच्छा नहीं होता । चार पैसे क्या आ गए कि तुमने  … Read more

मेरा अपराधी – ऋचा उपाध्याय : Moral Stories in Hindi

चार भाइयों की दुलारी चंदा दीदी , उनकी आज्ञा के बिना मायके में पत्ता भी नहीं हिलता था क्योंकि ससुराल में तीन दबंग ननदों के सामने उनकी एक न चलती। वैसे वो अपनी ननदों की भी नहीं चलने देतीं पर बेवजह की लड़ाई झगड़े और बहस से त्रस्त ससुराल का सारा गुस्सा मायके आकर उतारतीं … Read more

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