बड़ा बेटा – संगीता त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

“माँ,आज फिर आपने आशु भैया को खाने पर बुला लिया, कब समझोगी आप “। रिया फिर गुस्सा हो गई। “बेटे उसकी तबियत ठीक नहीं हैं, तो वो भी यहीं खा लेगा। बाहर का खाना उसको नुकसान करेगा”. ऊषा ने बेटी को समझाया। “पर आपकी तबियत भी ठीक नहीं, ऊपर से आप आशु भैया के रूममेट … Read more

आवारागर्दी – श्याम कुंवर भारती : Moral Stories in Hindi

राखी बहुत गुस्से में थी ।वो लगातार अपने दोस्त महेश को डांटते जा रही थी। सुधर जाओ वरना एक दिन बहुत पछताओगे। महेश ने ढिठाई से हंसते हुए कहा_ अरे यार क्यों अपना खून जला रही हो ।मैं बिगड़ा ही कब था जो सुधर जाऊं। तो ठीक है तो जाओ जो मर्जी हो करो मगर … Read more

रिश्तो में समझदारी – पूजा शर्मा : Moral Stories in Hindi

जैसेही रवि ऑफिस से घर आया ,  वह समझ गया आज फिर घर में कुछ हुआ है।  हुआ क्या होगा संध्या ने फिर कुछ उल्टा सीधा कह दिया होगा माँ को और शिखा को,  पिछले 1 साल से यही सब तो चल रहा है इस घर में। उसने देखा  बरामदे मेंबैठा उसकी बहन का 6 … Read more

दोनों बहुओं में अंतर क्यों सासुमां – संगीता त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

आज छोटे बेटे अजय की शादी थी।  अंजना बहुत व्यस्त थी।  खुश तो बहुत थी शादी से पर एक बात कचोट रही थी कि छोटी बहू थोड़ा सावंले रंग की है।  बेटा अजय तीनों बच्चों में सबसे सुन्दर है। पर वही जिद पकड़ लिया कि वह इसी लड़की से शादी करेगा। बड़ी बहू प्रीता गोरी … Read more

साथ रहकर अलग होने से अच्छा है अलग रहकर साथ होना… – सविता गोयल : Moral Stories in Hindi

” बड़ी भाभी सुना है आपका नया मकान बस बनने को हीं है। अब तो जब अगली बार आऊंगी तो लगता है आपके पास अलग से हीं आना पड़ेगा । बुलाएं तो गीं ना मुझे ??? ,, ममता अपनी बड़ी भाभी रीति से बोली लेकिन उनकी बोली में एक तंज था। या फिर शायद अपने … Read more

यही है अपनों का साथ – गीता वाधवानी : Moral Stories in Hindi

 दो बड़े भाई अतुल और विक्की, दो बड़ी बहनें प्रभा और माला और इन सबसे छोटी अनु। सब बच्चे माता-पिता और दादा-दादी के लाडले।   अतुल ने पापा का ड्राई फ्रूट्स का व्यापार संभाल लिया और विक्की ने रेडीमेड कपड़ों का। दोनों का विवाह भी अच्छे अमीर घरों में  हो गया था। प्रभा और माला का … Read more

*बहू तो बहू ही रहेगी* – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

             मालती को कुल दो वर्ष ही तो हुए थे शादीशुदा हुए।बड़े अरमान लिये बाबुल का घर छोड़ खींची चली आयी थी,नीरज के साथ इस बड़े घर मे,जहां उन दोनों के अतिरिक्त बस सासू मां और ननद रूपा ही थे।बड़ी गर्मजोशी से उसका स्वागत हुआ था।उसे लगा था अब वह हिरनी की तरह कुलाचे मारने वाली … Read more

अपनों का साथ – अयोध्या प्रसाद उपाध्याय : Moral Stories in Hindi

किसी के पास बहुत धन-दौलत हो जाय उससे कुछ भी नहीं होता जबकि उसके साथ दिल भी न हो ताकि आवश्यकतानुसार मौके पर उसका सदुपयोग कर सके। धनंजय एक ऐसा ही व्यक्ति था। यद्यपि वह प्रोफेसर था फिर भी वह क्यों इतना कंजूस हो गया था? कुछ लोगों का कहना था कि उसकी पत्नी उससे … Read more

अलविदा अनया – रवीन्द्र कान्त त्यागी : Moral Stories in Hindi

डैप्युटी कमिश्नर ऑफ पुलिस मिस्टर सत्यकाम दुबे घर के दरवाजे पर दस्तक देने ही वाले थे कि उन्हे भीतर से किसी पुरुष के फुसफुसाने के स्वर सुनाई दिये। उनका पुलिसिया दिमाग तुरंत सचेत हो गया और उन्होने कोट की जेब में पड़ी पिष्टल हाथ में ले ली। दरवाजे को ज़ोर का धक्का दिया तो सरकारी … Read more

प्यार का एहसास – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

   ” आह…हा..कितनी अच्छी हवा आ रही है…कितना सुंदर व्यू(view)है..रवि, देखो ना..।” खिड़की से परदा हटाकर किरण ने अपने दोनों हाथ फैला दिये।रवि हाँ कहकर चुप हो गया।फिर किरण बड़े बाॅक्स में से सामान निकाल कर रैक पर सजाने लगी तभी आशु ने पूछ लिया,” मम्मा…दीदी- बड़ी मम्मी कब आयेंगे?”  सुनकर उसके चेहरे पर नकारात्मक भाव … Read more

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