नयी दिशा – सरोज देवेश्वर : Moral Stories in Hindi
माँ ओ माँ कहाँ हों? सुधा ने लगभग चिल्लाते हुए घर में प्रवेश किया. पसीने से लतपथ , भूख से बेहाल सीधे रसोई की तरफ मुडी ही थी कि सामने से अचार का मर्तबान हाथ में पकडे आती हुई ताईजी के साथ टकराई और मर्तबान उनके हाथ से छूट जमीन पर गिर टुकड़े टुकड़े हों … Read more