उम्मीदों का दिया – रश्मि प्रकाश
**”दीदी!! ये घर हम दोनों बहुओं का है, तो इस घर की जिम्मेदारी भी हम दोनों की ही होनी चाहिए।** सिर्फ़ सुख में हिस्सा बंटाना ही बहू का धर्म नहीं होता, दुख में कंधा देना भी उसी का धर्म है। आप जेठानी हैं तो क्या हुआ? क्या मैं इस घर की बेटी नहीं?” बनारस के … Read more