*तुम्हारा मायका तुम्हारे ससुराल से बढ़कर है क्या?* – तोषिका

बहु क्या *तुम्हारा मायका तुम्हारे ससुराल से बढ़कर है क्या?* गुस्से वाली आवाज में लक्ष्मी ने अपनी बहु जाह्नवी से पूछा।

नहीं ऐसा कुछ नहीं है, आप ऐसा क्यों बोल रही हो? अब मैं अपने मायके भी बात नहीं कर सकती क्या?

मायके में बात करने के लिए कोई भी तुम्हे मना नहीं कर रहा है, बस तुम उधर ही सारा दिन फोन में लगी रहती हो। अपनी थोड़ी तो जिम्मेदारी समझो इस घर के प्रति, अब तुम इस घर की बहु हो। लक्ष्मी ने अपनी आवाज को ज्यादा ऊंची ना करते हुए बोली।

इस से पहले जाह्नवी कुछ बोले, उसका पति और लक्ष्मी का बेटा विनोद वहां आ गया और उधर जाह्नवी अपने मगरमच्छ के आंसू बहाते हुए बोली “देखिये ना विनोद, मम्मी मुझे मेरे मायके में बात करने के लिए मना कर रही है। अब आप ही बताएं कि घर की याद आएगी तो मैं अब बात भी ना करूं?”

लक्ष्मी अपने पक्ष में बोल ही रही थी कि विनोद बोला “क्या मां तुम भी ना, जाह्नवी को अपने घर पर बात करने से क्यों रोक रही हो? चलो मैं अपने कमरे में जा रहा हू, तब तक तुम मेरा खाना गरम करके रख देना जाह्नवी।” इतना कहकर विनोद अपने कमरे में चला गया और उधर जाह्नवी हस्ते हुए  रसोई में चली गई लेकिन लक्ष्मी बस वोही की वो ही खड़ी रही।

इस बात को ज्यादा समय नहीं हुआ था और लक्ष्मी उस बात को बिल्कुल भी नहीं भूला पा रही थी क्योंकि उसकी बात बिना सुने ही विनोद ने लक्ष्मी को सुना दिया था।

एक दिन लक्ष्मी बाहर सब्जी लेने गई, वहा उसको उसकी पुरानी दोस्त शीतल मिली। कुछ देर बात चीत होने के बाद शीतल बोली “क्या बात है लक्ष्मी, तुम कुछ परेशान लग रही हो। सब ठीक तो है ना?”

हां सब ठीक है, बस मैं अपनी बहु जाह्नवी जो सारा दिन मायके वालों से बात करती रहती है, उससे परेशान हू।”

शीतल थोड़ी हैरान हुई फिर बोली “तो इसमें क्या हो गया, अगर वो अपने मायके बात कर रही है?”

लक्ष्मी बोली “मुझे उस चीज से कोई दिक्कत नहीं है, अगर उसको बात करनी है तो करे पर ना चाहते हुए भी उसकी बातें सुनाई दे जाती है और वो इधर की बाते उधर करती रहती है।

आज ऐसा हुआ, आज उसने ऐसा किया आज मैने किस से कितनी बात की, सब कुछ।”

अपनी बात को जारी रखते हुए लक्ष्मी बोली “वो बिल्कुल भी बहु होने की जिम्मेदारी नहीं उठाती है, फिर जरा सा कुछ बोलदो तो अपने शब्दों में ना जाने किस किसको क्या बताती रहती है।”

शीतल ने सारी बात बड़े ध्यानपूर्वक सुनी और बोला “तुमने विनोद से बात की?”

लक्ष्मी ने अपना सर झुकते हुए बोला “उसको मैं क्या ही बोलूं, जाह्नवी जो बोल देती है, वो तो उसी को सच मान लेता है।”

शीतल ने बोला “तुम्हारी समस्या का हल है मेरे पास, लक्ष्मी।”

लक्ष्मी बहुत खुश हुई और बोली “क्या समाधान सोचा है तुमने?”

शीतल ने विस्तारपूर्वक सब बताया कि कैसे उसका बेटा सी आई डी में है और वो कॉल रिकॉर्डिंग और हिस्ट्री निकल सकता है, तब तक शीतल ने लक्ष्मी को जाह्नवी के तरीक़े से ही काम लेने को कहा।

तभी से लक्ष्मी ने भी फोन पर बात करना शुरू करदिया और जैसा जाह्नवी करती थी बिल्कुल वैसे ही किया और फिर जब जाह्नवी ने ये बात आकर विनोद को बताई, तो वो लक्ष्मी से बात करने आया ही था कि लक्ष्मी ने उसके सामने सारे कागज का ढेर और रिकॉर्डिंग वाली ड्राइव रख दी।

विनोद ने पूछा “ये क्या है?”

जिसपर लक्ष्मी हल्का सा मुस्कुराई और बोली “तुम्हारे सवालों के जवाब है बेटा, देख लो सब पता चल जायेगा।”

विनोद ने वो सब उठाया और देखने लगा, और जैसे जैसे वो आगे बढ़ रहा था वैसे वैसे उसका गुस्सा भी सातवें आसमान पर जा रहा था। तभी उसने सारी रिकॉर्डिंग सुनी और जाह्नवी को बोला “क्या है ये सब जाह्नवी, मैने तुम पर भरोसा किया और तुम हो कि यहां पीठ पीछे हमारी बुराई कर रही हो?”

जाह्नवी बोली “ये सब…ये सब झूठ है, मैने ऐसा कुछ नहीं बोला।”

विनोद और जाह्नवी की ऐसी लड़ाई चल ही रही थी कि बीच में लक्ष्मी बोली “बस करो तुम दोनों, मैने ये बस इसीलिए किया ताकि जाह्नवी बेटा समझ जाए कि ससुराल और मायके को अलग रखना होता है, एक  औरत बहु भी बन सकती है और एक बेटी भी।”

जाह्नवी को अभी इतनी बात समझ नहीं आई थी पर उसने अब इधर की उधर करना थोड़ा कम करदिया था और लक्ष्मी को पूरा यकीन था कि धीरे धीरे जाह्नवी की ये आदत छूट जाएगी।

लेखिका

तोषिका

error: Content is protected !!