दो आंगनों की धूप
स्वाति की आंखें नम हो गईं, लेकिन उसने अपने आंसुओं को होठों की मुस्कान से ढक लिया। वो एक झूठे, प्यार भरे गुस्से के अंदाज में बोली, “पापा! आप भी ना, हमेशा शिकायत करते रहते हैं। अरे, इसमें मेरी क्या गलती है? आप ही लोगों ने तो बचपन से कूट-कूट कर इतने अच्छे संस्कार दिए … Read more