पिंजरे की मैना – माधुरी शर्मा
“क्या एक बेटी की डोली उठने के बाद, उसके घर लौटने का रास्ता हमेशा के लिए बंद हो जाता है? या फिर स्वाभिमान की लड़ाई में मायके की दहलीज़ लांघना कोई गुनाह नहीं?” “माँ-पापा, मुझे माफ़ कर दीजियेगा। मैं आपकी ‘अच्छी बेटी’ नहीं बन पाई जो चुपचाप जुल्म सह ले। लेकिन मैं एक ‘आत्मनिर्भर औरत’ … Read more