किस्मत वाली बहू – रोनिता कुंडू : Moral Stories in Hindi

क्या बात है मां? कुछ कहना था? राज ने खाना खाते हुए अपनी मां प्रभा जी से कहा।  प्रभा जी:   हां वह पूछना था कि आज भिंडी कैसी बनी है?  राज:  हां अच्छी बनी है।  प्रभा जी: वह तो बननी ही थी, भिंडी के काटने के तरीके पर ही उसका स्वाद निर्भर करता है, … Read more

किस्मत या कर्मफल – आशा झा सखी : Moral Stories in Hindi

आज मानवी अपना सारा गृहकार्य समाप्त कर पढ़ने के लिए बैठी, सासु माँ ने आवाज लगा दी। अरे मानवी चाची जी आयी है। जरा दो कप चाय तो बना दो। मानवी ने झुंझलाकर अपनी किताब बन्द की और पहले आकर चाची सास के चरण स्पर्श कर उनका आशीष लिया और हालचाल लिए। फिर चाय – … Read more

कभी- कभी सेवा करवाने के लिए बीमार होने का दिखावा भी करना पड़ता है – रंजीता पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

विमला जी (६० बर्ष) अपने बेटी को बहुत बहुत ज्यादा मानती थी | हर बात पे मेरी बेटी ,मेरी बेटी करती रहती थी | विमला जी के पति राजेश जी, बहुत  समझदार और सुलझे हुए बुद्धि विचार वाले व्यक्ति थे | उन्ही के कारण उनके परिवार में  सब  हसी खुशी चल रहा था | उनका … Read more

ताली एक हाथ से नहीं बजती – डाॅक्टर संजु झा : Moral Stories in Hindi

नीता का आज बैंक में सिर भारी-भारी था,इस कारण अपने शाखा प्रबंधक को कहकर घर आ गई। घर आते ही थर्मामीटर लगाकर देखा तो सौ से ऊपर बुखार था।दो दिन से मेड भी नहीं आ रही थी।हिम्मत न होते हुए  भी उसने चाय बनाई और दो ब्रेड लेकर दवा खाने बैठ गई। किसी तरह दवा … Read more

“दूसरा सूरज” -: Moral Stories in Hindi

किरण देवी अपने जीवनसाथी की मृत्यु के बाद गहरे अकेलेपन में जी रही थीं। उनका बेटा और बहू विदेश में थे और अपनी व्यस्त जिंदगी में उलझे हुए थे। उन्होंने किरण को इस वृद्धाश्रम में रहने के लिए कहा ताकि वह अपने हमउम्र लोगों के साथ समय बिता सकें। यह वृद्धाश्रम अन्य वृद्धाश्रमों से अलग … Read more

भाविया – गीता वाधवानी : Moral Stories in Hindi

 उज्ज्वला  और आशीष के विवाह को 5 वर्ष पूरे होने जा रहे थे। आशीष की मां सुनीता जी को उनके यहां अभी तक संतान न होने की चिंता सताती रहती थी। व्रत, पूजा, अनुष्ठान,दवाइयां सब कुछ करवा चुकी थी  विवाह को छठा  साल भी शुरू हो चुका था।   तब ईश्वर की कृपा हुई और उज्ज्वला  … Read more

*सुकून की परीक्षा* – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

      मु —  न्ना,जल्दी आ रे देख तो तेरे बाबूजी को क्या हो गया है?जल्दी आ रे।          मम्मी क्या हुआ बाबूजी को?अरे ये तो बेहोश लग रहे हैं।मैं इन्हें अभी हॉस्पिटल लेकर चलता हूँ।मम्मी तुम चिंता न करो,मेरे बाबूजी को कुछ नही होगा।         राम शरण जी ने अपने बेटे शोभित को बड़े अरमानों से पाला था,वे … Read more

सिल्क की साडी – श्री प्रकाश श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

 ललिता और यशोधरा  चचेरी बहनें थी। दोनों की परवरिश एक ही परिवेश में हुयी। दोनों की समवयसी थी। साथ साथ खेला कूदा पढालिखा और बडी हुयी।  समय का चक्र ऐसा की दोनों की शादी एक ही मंडप में दो सगे भाईयों से हुयी। ललिता शुरू से ही चंट और चालाक थी। उसे यह गुण अपनी … Read more

समाधि (भाग-14) (एवं अन्तिम) – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral stories in hindi

***** पिछले अंक ( 13 ) का अन्तिम पैराग्राफ •••••• ***************************”******** सभी को मौली का यह सुझाव पसंद आया। मौली सिसकने लगी – ” कितना अरमान था कि इस घर से तुम्हें बेटी के रूप में विदा करूॅ और उस घर में बहू के रूप में स्वागत करूॅ लेकिन पता नहीं किसकी नजर लग गई … Read more

समाधि (भाग-13) – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral stories in hindi

************** पिछले अंक (12 ) का अन्तिम पैराग्राफ ********************************* उसने और शशांक ने अपनी जेब के सारे पैसे निकाल कर बूढ़े पिता के हाथ में रख दिये। हालांकि वह ले नहीं रहे थे लेकिन समाधि ने उनके दोनों हाथ पकड़ कर सिर से लगा लिया – ” अमरेन्द्र देते तो क्या आप न लेते? मैं … Read more

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