अपमान – संध्या सिन्हा : Moral Stories in Hindi

“बेटा! जरा फ्री हो तो … मेरे पांव दबा दो… बहुत दर्द है ।” “हाँ -हाँ तुम्हारी तरह ही फालतू बैठे है… ना…दिनभर तुम्हारे पाँव दबाए… और कोई काम तो है नहीं हमें ।” “रोज-रोज कहाँ कहते है… उमर हो गई है तो … कभी-कभार दर्द होता है तो कहते है…”सरिता रुवाँसी हो गयी और … Read more

इस बार भूल नहीं…. – पूर्णिमा सोनी : Moral Stories in Hindi

“आशी…कब से बाहर धूल में खेल रही है… भीतर आओ” नीलिमा जोर से चिल्ला रही थी… चिल्लाते चिल्लाते,गला सूख सा आया… और जोर से खांसी उठी, खांसते खांसते बिस्तर के एक किनारे लटक सी गई। घबराकर अनिमेष की नींद टूट गई। फ़ौरन उठकर बगल की टेबल पर रखे जग में से गिलास भरकर पानी  नीलिमा … Read more

सांप भी मर गया लाठी भी नही टूटी – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

” मम्मी जी कल मेरे पापा आ रहे हैं !” नई बहु शिवानी चहकती हुई अपनी सास आशा जी से बोली। ” अरे तो इसमें इतना खुश होने वाली बात क्या चौबीस साल बिताए हैं तुमने अपने पापा के साथ यहां तो तुम्हे आए चौबीस दिन ही हुए हैं । वैसे भी बहु हो तुम … Read more

इंतजार – पुष्पा कुमारी “पुष्प” : Moral Stories in Hindi

“कब तक अपने पिता के घर में बैठी रहोगी सौम्या! अपनी पसंद से ही सही विवाह कर तुम भी अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने की कोशिश क्यों नहीं करती!” आज सौम्या से मिलने आई उसकी बचपन की सहेली और अब दो प्यारे-प्यारे बच्चों की मांँ बन चुकी राधिका ने बातों ही बातों में सौम्या को … Read more

लम्बरदार – संजय मृदुल : Moral Stories in Hindi

बड्डे बिस्तर पर पड़े हैं, जैसे हड्डियों का ढांचा हो। पुराने बंगले के पीछे नौकरों के लिए बने मकान में दो मकान को जोड़कर बनाए हुए जर्जर घर मे। किसी जमाने मे ये बंगला इस गांव की अधिकांश जमीन इन्ही की हुआ करती थी। तालाब खेत खलिहान सब। किसी जमाने मे अंग्रेजो ने किसी बात … Read more

नाटक – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral Stories in Hindi

****** नई नवेली मण्डिता ने दुल्हन के रूप में जब ससुराल में कदम रखा तो सहेली और बड़ी बहन जैसी जेठानी स्वाति को पाकर बहुत खुश थी। पढाई और नौकरी के कारण उसे तो घरेलू काम बिल्कुल नहीं आते थे लेकिन स्वाति के कारण उसे नये घर में बिल्कुल परेशानी नहीं हुई। मण्डिता ऑफिस जाने … Read more

भाभी कैसे बर्दाश्त करती हो ये सब – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

मुफ्त की रोटियां खाने सब आ जाते हैं तेरे मायके से क्या धर्मशाला खुला है क्या यहां ‌।जब देखो तब कोई न कोई आया ही रहता है तेरे घर से शकुन्तला देवी अपनी बहू साधना पर चिल्ला रही थी।घर के ऊपर के हिस्से में शकुन्तला जी की देवरानी रहती है उनकी बेटी नयना सब सुन … Read more

अपमान – खुशी : Moral Stories in Hindi

राखी एक भले घर की लड़की थी मेहनत करती अपना घर संभालती। पिताजी एक मामूली क्लर्क थे।मां अक्सर बीमार रहती तो घर की भाई बहन की जिम्मेदारी उस पर  ही थी।बिचारी कभी किसी को किसी काम को मना नहीं करती।तो आस पास वाले भी अपने काम करवाते थे।समय गुजरा  मां गुजर गई। भाई बहन स्कूल … Read more

मेरा क्या कसूर था। – रश्मि पियुष : Moral Stories in Hindi

मेरी दादी को गुजरे तीस साल हो गए । तब मैं कॉलेज में पढ़ती थी। वैसे तो दादी बहुत ही सुन्दर और सीधी सादी थी। सबके साथ बहुत ही अच्छा व्यवहार था उनका । पूरे मोहल्ले भर की फेवरेट थीं वो। पर जैसे ही दादाजी का जिक्र होता, उनका पारा सातवें आसमान पर होता । … Read more

मुट्ठी भर आसमां – पूनम भटनागर : Moral Stories in Hindi

 नवकुंज  एक अच्छी सोसायटी है, जो कि अभी दो साल पहले ही बनी है। यहां उच्च तथा उच्चतम श्रेणी में आने वाले रहते हैं। सभी सुविधाओं से सुसज्जित यह सोसायटी आने वालों की नजर में आ जाती है। इन्हीं घरों में से रहने वालों में एक घर में मिनाक्षी भी अपने माता-पिता तथा बड़े भाई … Read more

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