आख़िरी मुलाकात – कंचन श्रीवास्तव आरज़ू : Moral Stories in Hindi

सुनो घर चलते हैं वर्षो हुए घर नहीं गए।हर बार छुट्टियों में कही न कही घूमने का प्लान बन जाता है और हम सब पहाड़ों पर चले जाते है तो घर जाना रह ही जाता है कहते हुए ओम नहाने चला गया। जिसे रसोई में नाश्ता बनाती अनु से सुना और सोचने लगी।चलो अच्छा है … Read more

एक वेडिंग – हरीश श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

लीजिए सक्सेना साहब,मिल लीजिए लड़के से और बुलाइए बिटिया को ताकि दोनों लोग बात कर सकें। वीरेन्द्र सक्सेना कार्पोरेशन में सीनियर सिविल इंजीनियर थे।अच्छा खासा नाम और कमाई थी।पर एक हद में ही रहते थे।एक लड़की थी बड़ी रत्ना जिसने हाल में ही एमबीए किया था और एक लड़का जो किसी प्राइवेट कम्पनी मे इंजीनियर … Read more

जब बच्चों को अकेले रहने की आदत पड़ जाती है तो बड़े- बुजुर्गों से उन्हें बंधन दिखाई देने लगता है। – कमलेश राणा : Moral Stories in Hindi

सुमि और सूरज का बड़ा अरमान था कि उनका बेटा डॉक्टर बने इसके लिए उन्होंने अभि को कोचिंग के लिए कोटा पढ़ने भेज दिया। कुछ दिन अभि का मन वहाँ बिल्कुल भी नहीं लगता था हर समय घर- परिवार की याद सताती रहती उसे।  सुमि ने कभी भी उससे घर का कोई काम नहीं करवाया … Read more

कल ,आज और कल! – वर्षा गर्ग : Moral Stories in Hindi

 ” पिताजी ! आप फिर आज स्कूल में धोती पहनकर क्यों आये थे? मेरे सभी दोस्त मज़ाक बनाते हैं। इससे तो अच्छा था मुझे किसी हिन्दी मीडियम स्कूल में ही पढ़ने भेजते।” “अरे रे बबुआ! इतना गुस्सा काहे करते हो,अबकी बार शहर से एक पतलून ले आयेंगे और पूरे साहब बनकर स्कूल में आयेंगे, ठीक … Read more

कभी नहीं… – रश्मि झा मिश्रा : Moral Stories in Hindi

गुस्से से पैर पटकती दामिनी… खुद से बड़बड़ाती… किचन में जाकर फटाफट सब्जियों पर छुरी पटक पटक कर… अपना गुस्सा निकालने लगी… जल्दी-जल्दी हाथ चलाते हुए… उसने कुकर में सारी सब्जियां डालकर सूप बनने को चढ़ा दिया…  बच्चों की तो कब से फरमाइश हो रखी थी… मशरूम की सब्जी और साथ में पूरी… सब बनाकर … Read more

गलती मेरी थी – डा.शुभ्रा वार्ष्णेय : Moral Stories in Hindi

जब उसके ‘केबिन’ में आ राधेश्याम ने बत्ती जलाई तो मानो अंधेरे की चादर में रोशनी की अनेक दरारें पड़ गई। उसी तरह से जैसे पिछले कई दिनों से वर्तिका की भाई अतुल के साथ संबंधों में दरारें आ गई थी। शुरू से महत्वाकांक्षी रही वर्तिका के जीवन का लक्ष्य बिना उतार-चढ़ाव के सीधी सपाट … Read more

मोहताज – दीपा माथुर : Moral Stories in Hindi

आंखो के लिए भी नीचे काले काले रंग निशान ,चेहरा पीला सा पड़ गया था। हाथ पैरों में तो मानो जान ही नहीं रही। अकेले कमरे में घुट घुट कर बैजान सी हो रही थी। वो बिंदास रहने वाली पूजा। जैसा नाम वैसा ही व्यवहार । सबसे मिलना जुलना हसना ,हसाना मानो फूल सी काया … Read more

भाभी – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

हेलो दीपिका कैसी हो , हां ठीक हूं भाभी।तुम लोग तो अपनी भाभी को जैसे भूल ही गई हो ।आज मैंने गीतिका को भी फोन लगाया था । जबसे सासूमां इस दुनिया से गई हैं तुम लोग तो मुझे और भइया को जैसे भूल ही गई हो अरे अभी भाभी भइया की भी खोज खबर … Read more

पछतावे के आँसू.. – शीतल भार्गव : Moral Stories in Hindi

रामू की आँखों से नींद कोसों दूर थी ,मन ही मन बहुत पछता रहा था कि काश उसने अपनी माँ की बात मानी होती यह सोच-सोच कर रोज ही रोता रहता । औरपुरानी बातें याद करने लगता ।एक छोटे से गाँव में रामू नाम का लड़का रहता था ।वह एक गरीब क़िसान का बेटा था … Read more

कलंकित रिश्ता – अर्चना सिंह : Moral Stories in Hindi

संध्या ने चीखते हुए कहा..”बस कर अंशिका ! कुछ भी बोलती रहती है, जब देखो तब चाचू की शिकायत करती रहती है । एक तो तेरे चाचू नहीं हैं कोई ,ऊपर से ये पवन चाचू तेरे पापा के ममेरे भाई ! हमारे पड़ोसी होने के साथ – साथ तुम्हें पढ़ाने में भी कितनी मदद करते … Read more

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