मेरा भी आत्मसम्मान है – निशा जैन : Moral Stories in Hindi

“बस मां बहुत हो गया अब मुझे नहीं करनी अपनी प्रदर्शनी बार बार। हर बार कोई नया रिश्ता आता है और हमेशा की तरह मेरे आत्मसम्मान को चोट पहुंचा कर मना कर दिया जाता है। माना कि मैं कद काठी में मोटी और छोटी ज़रूर हूं पर मेरा भी आत्मसम्मान है और अब मैने भी … Read more

बहू और बेटी – मधु वशिष्ठ : Moral Stories in Hindi

—————- आपको तो अपनी बहू की अच्छाई के सिवाय कुछ दिखाई ही नहीं देता। अपनी हालत देखो जरा? इस उम्र में जबकि आप और पापा को निश्चिंत होकर आराम से रहना चाहिए था उस समय बैठकर बच्चों की आयागिरी कर रहे हो। पार्क में घूमने के लिए पापा जाते हैं तो बाकि सब लोग तो … Read more

नई टीशर्ट – अमित रत्ता : Moral Stories in Hindi

लालू की दिल्ली में एक फैक्टरी में नई नई नौकरी लगी तो बीबी बच्चों को छोड़कर दिल्ली चला गया। आज लालू की छुट्टी थी कुछ दोस्तों के साथ चांदनी चौक घूमने चला गया वहां कपड़ों की सेल लगी हुई थी। लालू को एक टीशर्ट पसंद आ गई जो सौ रुपए की थी मगर थी थोड़ी … Read more

आजी – डाॅ उर्मिला सिन्हा : Moral Stories in Hindi

 मेरी नजर में….विशिष्ट  नारी    वैसे तो इस उम्र तक आते-आते अनेकों विशिष्ट स्त्रियों का सानिध्य प्यार मिला… जिसमें अनेक विदुषी थी… अपनी कार्यक्षेत्र की अग्रगणी … जिनपर मैंने अनेक बार लिखा भी है… लेकिन आज मेरे वाल्यकाल की स्मृति में एक नाम उभरकर आया है वह है….आजी।    आजी से हमारा कोई रक्त संबंध नहीं था … Read more

एक फैसला आत्मसम्मान के लिए – डाॅ संजु झा : Moral Stories in Hindi

पुराणों में वर्णित है कि बहुत पुण्यकर्म करने के बाद मनुष्य योनि में जन्म लेने का सौभाग्य प्राप्त होता है। मनुष्य योनि प्राप्त होने पर व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह अपनी जिन्दगी को व्यर्थ  बनाऍं या  अपने आत्मसम्मान की खातिर एक फैसला लेकर अपनी जिन्दगी को एक नया आयाम दे। कबीरदास जी ने … Read more

पैरों की धूल समझना – रंजीता पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

रीता और रमन की शादी को पंद्रह साल हो गये थे । रीता की शिक्षा हिंदी मीडियम से हुई थी । जिस कारण उसको  अंग्रेजी बोलने में असुविधा होती थी । लेकिन हिंदी में उसकी पकड़ बहुत अच्छी थी ।रमन  रीता को” अपने पैरों की धूल समझता” था ।  बात बात पे गवार शब्द का … Read more

महाकुंभ स्नान – अविनाश स आठल्ये : Moral Stories in Hindi

नहीं बेटा, तू रहने दे…अभी तो तेरी नई नौकरी लगी है, तुझे इतनी जल्दी छुट्टी कैसे मिलेगी? वैसे भी घुटनों के दर्द के कारण मुझसे चला नहीं जाता, मैं नहीं जाऊंगी महाकुंभ स्नान करने को… सुधा ने वाट्सएप कॉल पर अपने इकलौते बेटे शिशिर से कहा.. सुधा के बेटे शिशिर ने लगभग 10 महीने पहले … Read more

अपने नाम से पहचान – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

  ” सीमा..चलो ना…नये जीएम की वाइफ़ की पहली मीटिंग हैं..सुना है..वो स्पीच(भाषण) बहुत अच्छा देती हैं।कल ‘महिला-दिवस’ भी तो है..वो ज़रूर कुछ अच्छा ही बोलेंगी।” राधिका ने अपनी सहेली से कहा तो वो ना-नुकुर करने लगी।तब राधिका बोली,” ठीक है..तुम चलो, अगर बोर होने लगी तो हम वापस आ जायेंगे।” वापस आने की कंडीशन पर … Read more

ठूंठ में जीवन बाकी है – सीमा प्रियदर्शिनी सहाय : Moral Stories in Hindi

शाम ढलने लगी थी। सूर्य देव अस्ताचल की ओर धीरे-धीरे अग्रसर हो रहे थे। आसमान शांत था ।पक्षियों का झुंड कोलाहल करते हुए अपने घोंसले की ओर बढ़ता जा रहा था। सब कुछ प्रकृति के नियमानुसार ही घट रहा था सिर्फ एक उन्हें छोड़कर। प्रकृति न जाने क्यों उनके ऊपर कुपित हो गई है ? … Read more

क्या रंग भेद सही है – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

” मेरी शादी की चिंता आप छोड़ दीजियेगा हाथ जोड़ कर विनती है आपसे नही करनी मुझे शादी। आप चाहे तो सुमि की शादी कर सकते है !” नम आँखों से नीति ने अपने माता पिता से कहा। ” पर बेटा ऐसे कैसे ये फैसला कर सकती हो तुम बड़ी हो तुम्हारी शादी नही होगी … Read more

error: Content is protected !!