मां पापा मैं आप लोगों के चक्कर में अपनी पत्नी का दिल नहीं छोड़ सकता – मंजू ओमर

मम्मी पापा आप दोनों वापस घर चले जाओ , यहां पर वंदिता के मम्मी पापा आ गए हैं।वे लोग वंदिता और उसके बच्चे की देखभाल कर लेंगे। लेकिन बेटा हम लोग भी तो पहली बार दादा दादी बने हैं। मुझे भी खुशी है और मैं भी चाहती हूं कि मैं भी बहू और उसके बच्चे … Read more

पहला प्रेम पत्र – एम. पी. सिंह

बात बहुत पुरानी हैं लेकिन यादें एकदम ताज़ा. ये बात हैं जब में कॉलेज के तीसरे साल में था. एक दिन मैंने लाइब्रेरी से एक रेफरेंस बुक इशू करवाई, तभी एक खूबसूरत सी लड़की सरिता मेरे पास आकर बोली, मुझे ये बुक चाहिए, मुझे कल ऐसाइनमेंट जमा करना हैं, बोलते हुए उसके चेहरे पर कोई … Read more

कांच की चूड़ियाँ – डॉ उर्मिला सिन्हा

“क्यों केशव?” मृणालिनी ने केशव की तरफ देखे बिना पूछा। “उस दिन तुम क्यों नहीं आए थे? हम भागकर शादी करने वाले थे न? मैं स्टेशन पर दुल्हन के जोड़े में तुम्हारा इंतज़ार करती रही। पूरी रात… और तुम? तुम गायब हो गए। बाद में पता चला कि तुमने अपने पिता के दोस्त की बेटी … Read more

पिता का वनवास – मुकेश पटेल 

ट्रेन की रफ़्तार के साथ-साथ सुमन के दिल की धड़कनें भी बढ़ती जा रही थीं। खिड़की से बाहर भागते हुए पेड़ और खेत उसे अपने बचपन की याद दिला रहे थे। पूरे तीन साल बाद वह अपने मायके, अपने शहर लखनऊ वापस आ रही थी। गोद में छह महीने का बेटा ‘आरव’ सो रहा था … Read more

स्वाभिमान का कन्यादान  – गरिमा चौधरी 

*शादी के मंडप में जब लड़की के पिता ने कांपते हाथों से शगुन का लिफाफा बढ़ाया, तो लड़के की माँ ने उसे ठुकरा दिया। सन्नाटा छा गया। सबने सोचा मांग बड़ी है, पर उस माँ ने जो किया, उसने बारातियों की आँखों में पानी ला दिया। क्या एक ‘बेटे वाली’ सच में ‘बेटी वाले’ का … Read more

अंतिम प्रार्थना – रीमा साहू

*क्या प्रेम का मतलब सिर्फ थामे रखना है या कभी-कभी मुक्त कर देना ही सबसे बड़ा प्रेम है? पढ़िए एक ऐसी पत्नी की दास्तां जिसने अपने पति के लिए वो दुआ मांगी जिसे मांगने में रूह कांप जाती है।* आज शाम को भी ऐसा ही हुआ था। विनोद अचानक हिंसक हो गए थे। उन्होंने अपने … Read more

कांच के महल – विनीता खन्ना 

ससुर ने दामाद की फटी जेब देखकर उसे भरी महफ़िल में ‘बेचारा’ कह दिया, लेकिन उसे नहीं पता था कि वक्त का पहिया जब घूमता है, तो वो राजा को रंक और रंक को राजा बना देता है। क्या स्वाभिमान की जीत दौलत के अहंकार को हरा पाएगी? रवि ने अपनी पुरानी स्कूटर को तीसरी … Read more

दिल के रिश्ते: एक मां का फैसला – गीता गुप्ता

*जब बेटी ने पिता की चिता की राख ठंडी होने से पहले ही जायदाद का बंटवारा मांग लिया, तब एक मां ने जाना कि कोख से जन्म देने से कोई अपना नहीं होता। पढ़िए एक ऐसी मां की कहानी जिसने समाज के डर से नहीं, बल्कि अपने स्वाभिमान के लिए एक कठोर फैसला लिया।* सावित्री … Read more

जज़्बातों का डाकिया  – रोनिता कुंडु 

*इस डिजिटल युग में जब उंगलियों के एक टच से संदेश पहुँच जाते हैं, तब एक बूढ़ा जोड़ा पुराने संदूक से स्याही और कलम निकालकर टूटे हुए दिलों को जोड़ने का काम कर रहा था। क्या उनकी यह ‘पुरानी आदत’ आज के ‘नए दौर’ के रिश्तों को बचा पाएगी?* “सुधा… ओ सुधा! अरे, वो नीला … Read more

सिंदूर का कर्ज  – लतिका श्रीवास्तव

*जब एक औरत पर लगा अपने ही जीजा के साथ अवैध संबंध का घिनौना आरोप, तो उसने अपनी पवित्रता की कसम खाने के बजाय स्वीकार कर लिया वो गुनाह जो उसने किया ही नहीं था। आखिर किस सच को छिपाने के लिए एक भाभी अपनी ही ननद की सुहाग की सेज उजाड़ने को तैयार हो … Read more

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