समझदारी – पूनम भारद्वाज : Moral Stories in Hindi

आज रावी ऑफिस में बहुत थक गई थी। वह अपने कमरे में आकर निढाल पड़ गई।तभी रोहित भी आ गया। थोड़ी देर में सुधा जी उन दोनों के लिए कमरें में चाय ले आई। रावी ,रोहित लो बेटा चाय पी लो। रावी ,सुधा जी से चाय लेते हुए बोली ,” मां आपको क्या पता कि … Read more

 वक्त – खुशी : Moral Stories in Hindi

मोहिनी 2 भाइयों की अकेली बहन थी।पिताजी रतन सिंह की अच्छी बल्ब बनाने की फैक्ट्री थी। भाई नरेश और सुरेश भी पिता के कारोबार से जुड़े थे।उनकी मेहनत से एक की दो फैक्ट्री हो गई थी।मोहिनी घर भर में सबकी लाडली थी हद से  ज्यादा लाड प्यार पर मा, पिताजी ,भाभिया भाई  सब नाज नखरे … Read more

 संयुक्त परिवार का साथ – गीता वाधवानी : Moral Stories in Hindi

 अशोक और आशा जी अपनी बेटी शगुन की शादी के लिए बहुत चिंतित थे। अब तक जो भी रिश्ते आए थे वह उन्हें जँच नहीं रहे थे। अबकी बार जो रिश्ता आया था उसे परिवार में सब कुछ अच्छा था और लड़का शुभम तो बहुत ही बढ़िया था।अशोक जी जब से उससे मिलकर आए थे … Read more

 खुशियों की कुंजी संयुक्त परिवार – डॉ बीना कुण्डलिया : Moral Stories in Hindi

 ये लड़की भी न बहुत जिद्दी हो गई है अपनी मन की करनी है  इसे बस और कुछ नहीं, एक तो आपने भी ना इसको ज्यादा ही छूट दे रखी है । रमा देवी अपने पति सोमेश से बोली अब देखो, अच्छा भला लडका, सुन्दर है अच्छी नौकरी शिक्षित परिवार और क्या चाहिए ..? मैं … Read more

अम्मा – संध्या त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

    भैया देख ना , फ्रिज में ताला लगा है…. पक्का मां मिठाई मंगवाई होगी…. मामा , मामी आने वाले होंगे…. तन्वी ने तरुण का हाथ पकड़ कर फ्रिज के सामने लाकर खड़ा कर दिया… तरुण ने भी फ्रिज का हैंडल अपनी ओर खींचते हुए कहा…. हां तन्वी ये तो बंद है….।        बस फिर क्या था…. … Read more

 मुंह मोड़ना – पूनम भारद्वाज : Moral Stories in Hindi

साधारण रंग रूप मगर गुणवान तनिषा को उसकी जेठानियाँ और ननदे सांवली होने के कम अहमियत देते थे।     तनिषा का रंग रूप भले ही सांवला था मगर मन की एकदम साफ।जो लोग उसे कम पसंद करते फिर भी वह उनके हर काम के लिए तत्पर रहती।            कुकिंग,पेंटिंग, सिलाई, बुनाई हर कार्य में निपुण। … Read more

 लड़ाई – डॉक्टर संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

अरे! आज फिर कूड़ा डाल दिया मेरे अहाते में? जया गुस्से में बड़बड़ाई..ये मालिनी भी न जाने कब मैच्योर होगी? मम्मी!मालिनी आंटी हमसे चिढ़ती हैं,हमेशा नज़र लगाती हैं हमारी खुशियों पर और जब तब चोरी छिपे ये ओछे काम करती रहती हैं। श्वेता बोली। नहीं ..अब मैं और चुप नहीं रहूंगी..आज उसको समझा के ही … Read more

 माँ तो माँ होती है – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

“ सुन रही हो माँ की तबीयत बहुत ख़राब है अब उनके बचने की उम्मीद जरा भी नहीं है…. भैया कह रहे थे एक बार आकर उन्हें देख लो ।”कुन्दन अपनी पत्नी रूचि से कह रहा था जिसकी आँखों में आँसू और आवाज़ में कंपन रूचि महसूस कर रही थी  “ तुम्हें क्या लगता है … Read more

 सास का सबक…. – अमिता कुचया : Moral Stories in Hindi

सुबह के दस बजे चुके थे, तभी वहां नेहा कपडों का ढेर लगाकर रखती है। उसी समय संध्या भी गंदे कपड़े की गड्डी लेकर आ जाती है,अरे नेहा तूने कपडों का ढेर क्यों लगाकर रखा है? आज मुझे कपड़े मशीन में लगाने है, ये संध्या अपनी देवरानी नेहा से कहती है, तब नेहा कहती- भाभी … Read more

 दूसरा मायका – रत्ना पांडे : Moral Stories in Hindi

संयुक्त परिवार में पली-बढ़ी लता बहुत ही संस्कारी थी।   सबकी चहेती थी वह, भगवान ने भी रंग रूप देने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। दादा-दादी, चाचा-चाची, ताऊ-ताई, छह बहन, पाँच भाई इतना बड़ा परिवार था उसका। परिवार में इतनी बेटियाँ होने के कारण शीघ्र ही उनका विवाह कर दिया जाता था। लता भी … Read more

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