मदद – सिम्मी नाथ : Moral Stories in Hindi
तू बिल्कुल नहीं समझता अक्लू , इतना रात तक कहां भटक रहा था ? आप काहे नहीं सोए बाबूजी मैं थोड़ा काम से गया था । मैं सोने ही वाला था ,कि तुम्हारी दादी खाँसने लगी ,उसे ही पानी देने गया ,तो तू नदारद था। तेरा लंगोटिया रघु के साथ घूमता होगा है, न? … Read more