मनमुटाव – कंचन श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

ट्रिक ट्रिक ……..के घंटी की आवाज़ के साथ रेखा दरवाज़ा खुलने की प्रतिक्षा करने लगी।इतने में भीतर से कौन की आवाज के साथ दरवाज़ा खुला। खुलते ही रेखा को सामने देख भतीजा राहुल बोल उठा अरे! बुआ आप नमस्ते आइये आइये। मां देखो बुआ आईं हैं।कहता हुआ भीतर चला गया और वो जवाब देकर वही … Read more

तोहफा – डॉ० मनीषा भारद्वाज : Moral Stories in Hindi

उस शाम का सूरज भी थक कर लाल हो रहा था, जैसे अविनाश के दिन भर के काम के बोझ से। कार से उतरते हुए उसने जेब में पड़े छोटे से मखमली डिब्बे को दबाया। सालगिरह का तोहफा था – प्रगति के लिए। एक सोने की नाजुक चेन, उसकी कई महीनों की गोपनीय बचत का … Read more

स्मृतियों की माला – डॉ० मनीषा भारद्वाज : Moral Stories in Hindi

पुरानी संदूकची की धूल चाटती कुंडी खुली। अंदर, समय के क्षय से बचे कागज़ों की सुगंध थी – पुरानी मासूमियत और स्याही की मद्धिम खुशबू। रितिका ने हाथ बढ़ाया। उंगलियां एक मोटे फाइल के ऊपर ठहरीं, जिस पर उसकी बचपन की टेढ़ी-मेढ़ी लिखावट में लिखा था – “मेरी जीतें”। इसे खोलना… स्मृतियों की एक माला … Read more

घर दिवार से नहीं परिवार से बनता है – सुदर्शन सचदेवा : Moral Stories in Hindi

तनु और मनु ने नया घर लिया था – शहर के पाश कालोनी में पांच कमरों वाला अपार्टमैंट,  इटालियन मार्बल  , स्मार्ट लाइटस, और दरवाजा अपनी आवाज से खुलता है | हर सिस्टम को स्पेशल तस्वीर दी और कैप्शन था – “और ड्रेयम होम”  लोगों ने बहुत सी तारीफ के लिए अलग अलग शब्द कहे … Read more

अधपकी सब्जी – संध्या त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

मम्मी….. मम्मी….आज टिफिन में सब्जी काहे का दी थीं…..?  क्यों… क्या हुआ…?     आरंभ के प्रश्न पर स्वरा ने भी आश्चर्य से प्रश्न ही कर डाला….!       बहुत तारीफ हुई सबको बहुत पसंद आया…. वैसे तो मेरे टिफिन की हर रोज ही तारीफ होती है पर आज सब्जी तो वाकई कमाल का बना था….। बेटा मिक्स वेज … Read more

अपनों से कैसी ईष्या – अमिता कुचया : Moral Stories in Hindi

दरवाजे पर कमला जी की टिकी हुई थी। कोई भी आहट होती तो उन्हें लगता कि कहीं विमला तो नहीं आ गयी। विमला उनकी छोटी बहन है ,उससे सुबह बात हुई। कि उसे अपने ननदोई के रिटायरमेंट की पार्टी में आना है। एक दिन रुकेगी,अगले दिन अपनी ननद के यहाँ जाएगी। कमला जी छोटी बहू … Read more

“ईर्ष्या की राख में झुलसते रिश्ते” – सुबोद्ध प्रण : Moral Stories in Hindi

रेणु और सुमेधा—दोनों बचपन की सहेलियाँ थीं। एक ही मोहल्ले में पली-बढ़ीं, एक ही स्कूल में पढ़ीं, एक ही कॉलेज में गईं। लोग अक्सर उन्हें ‘राम-लक्ष्मण’ की जोड़ी कहते। दोनों में बहुत कुछ समान था—सपने, उम्र, रुचियाँ, यहाँ तक कि शक्ल-सूरत भी मिलती-जुलती थी। लेकिन एक चीज़ थी जो समान नहीं थी—किस्मत। रेणु एक मेहनती … Read more

राज को राज रहने दो – विमला गुगलानी :Moral Stories in Hindi

 “ ममी मेरी वो जयपुरी लहरिया लाल पीली चुन्नी नहीं मिल रही, कहीं देखी आपने, आज कालिज में तीज उत्सव मनाया जा रहा है, तो मैनें वो ओढ़नी थी” छवि ने तैयार होते होते मां से पूछा।    “ मिलेगी कहां से, वो तो छाया को ओढ़े देखा मैनें, अभी अभी तो गई है , तेरे … Read more

विश्वास को खोते देर नहीं लगती – एकता बिश्नोई : Moral Stories in Hindi

सीमा ने दरवाजा खटखटाया ।”खोलती हूंँ… कौन…?”आवाज के साथ दरवाजा खुला..। उसकी बड़ी बहन रीमा ने दरवाजा खोला।”अरे..! सीमा आज सुबह-सुबह कैसे…?”” ऐसे ही दी..बस..आपसे और गौरी से मिलने का मन किया तो चली आई.. क्यों बिना बताए नहीं आ सकती क्या.”. “नहीं..ऐसी तो कोई बात नहीं है..।” कहते हुए रीमा कुछ झिझकी।” ” गौरी … Read more

विश्वास खोते देर नहीं लगती – मधु वशिष्ठ : Moral Stories in Hindi   

जतिन और प्रिया का विवाह हुए अभी केवल 5 महीने ही हुए थे परंतु घर के तो रंग ढंग   ही बदल गए थे । वर्मा जी के साधारण से संयुक्त परिवार में उनके तीन बेटे थे। उनके दो बेटों का विवाह  हो चुका था। और उनके बड़े बेटे के दो बेटे और छोटे के एक … Read more

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