सम्मान का स्वाद – आरती झा आद्या : Moral Stories in Hindi

काँधे पर झुकी उम्र, आँखों पर मोटे शीशों वाला चश्मा, और उँगलियों में अब भी वर्षों पुरानी सुई की पकड़—ये थे विष्णु प्रसाद। दिल्ली की एक पुरानी गली के कोने पर उनका छोटा-सा सिलाई ठेला था, जो वर्षों पहले एक सुनहरे सपने की तरह शुरू हुआ था। अब वहीं बैठकर वे फटी जेबें टाँकते, टूटे … Read more

 सम्मान की सूखी रोटी – डॉ आभा माहेश्वरी : Moral Stories in Hindi

बूढ़े पिता हरि को गाँव में अकेला छोड़कर उसका बेटा जो शहर में इंजीनियर था बम्बई चला गया और वहीं अपने साथ काम करने वाली वसुधा से शादी करली और बम्बई में ही सैटिल होगया- –अकेला बेटा  लेकिन निर्मोही– जिसको अपने पालक पिता का तनिक भी ख्याल नही– चला गया अकेला छोड़कर असहाय। लेकिन उसके … Read more

 सम्मान किसी पद या विभाग का मोहताज नहीं होता – प्रतिभा भारद्वाज ‘प्रभा’ : Moral Stories in Hindi

सुबह की ठंडी हवा चल रही थी; कैलाश नाथ जी छत पर बैठकर सुबह की चाय का आनंद ले रहे थे और अखबार पढ़ते जा रहे थे कि तभी अखबार के एक पृष्ठ की हैड लाइन पर उनकी नजर पड़ी ‘प्रधानाचार्य कक्ष में बोर्ड परीक्षाएं देते विद्यार्थी पकड़े, कार्यवाही’ जब उन्होंने पूरी खबर पढ़ना शुरू … Read more

 पकोड़ीयाँ : Moral Stories in Hindi

जगदीश बाबू को पकौड़ियाँ बहुत पसंद थी ।सभी को पसंद होती है पर उन्हें कुछ ज्यादा। जब भी घर में कढी बनती तो बसंती देवी को सख्त हिदायत थी,पहले एक प्लेट पकोड़ी जगदीश बाबू के लिए।   कई बार बसंती देवी हंस कर बोलती, “देख लो, सोमेश के बाबूजी,तुम्हारी यह आदत कब जायेगी।” अब तो बीपी … Read more

 मास्टर साब – डॉ. संगीता अस्थाना : Moral Stories in Hindi

हमारे मित्र मंडली सारे रिटायर्ड लोग ही थे जिसमे मास्टर साब सबसे ज़्यादा सीनियर थे । सभी उन्हें बहुत सम्मान देते थे । वे बहुत अनुभवी थे ।चुटकियों में हर समस्या का समाधान निकल लेते थे ।मुहल्ले के सभी लोग उनसे राय मशविरा करने के बाद ही किसी कम में हाथ लगाते थे ।सबके लिए … Read more

 ये हुई ना बात – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

माधुरी सास की बात सुनकर चुप रही । वह जानती थी कि कुछ भी कह ले …. माँ को अपनी ही बात ऊपर रखने की आदत है । चाहे गलती उनकी ही क्यों ना हो । सच कहें तो अब उसे बुरा भी नहीं लगता था….. या शायद उसने यह कहना सीख लिया था कि … Read more

 तुलना-मनीषा सिंह : Moral Stories in Hindi

“अंबा! बापू के बातों का बुरा नहीं मानते•• चल कपड़े बाहर निकाल! राधा अपनी बड़ी बेटी जो पेटी में कपड़े डाल वहां से जाने की तैयारी कर रही थी, से बोली। अम्मा! मुझे रूकने के लिए मत बोल भले ही मैं सन्नो जैसी अमीर घर में नहीं ब्याही गई परंतु मेरा भी कुछ स्वाभिमान है! … Read more

 सम्मान की सूखी रोटी – मुकुन्द लाल : Moral Stories in Hindi

 धर्मपाल और  अनीश्वर एक ही मोहल्ले में रहते थे। दोनों पड़ोसी थे। दोनों के मकान पास पास ही थे। दोनों दो विभाग में सर्विस करते थे। अंतर सिर्फ इतना था कि  अनीश्वर अपने दफ्तर का बॉस था, जबकि धर्मपाल अपने ऑफिस का बड़ा बाबू था। कभी- कभार किसी फंक्शन या पर्व त्यौहार के मौकों पर … Read more

 गिरजा बुआ… – रश्मि झा मिश्रा : Moral Stories in Hindi

“जा…गिरजा बुआ को बुला ला… तुझसे नहीं होगा…!” कोई भी शादी ब्याह हो… तीज त्यौहार हो या फिर जन्म मरण… बिना गिरिजा बुआ के तो पूरा माहौल ही सुना हो जाता था… मंडप सजाने से लेकर… रंगोली बनाने… गीत गाने से लेकर अपनी चटपटी बातों से महफिल जमाने में गिरजा बुआ से बेहतर कोई नहीं … Read more

 मेरी दोनों बहुएं बहन जैसी रहती है – दीपा माथुर : Moral Stories in Hindi

धूप सी सुबह थी। रसोई में हँसी की खनक थी। राधिका बेलन से पूरियां बेल रही थी और अनुजा कड़ाही में हलवा चला रही थी। मसालों की खुशबू, दूध की मिठास और दोनों के बीच की खनकती बातचीत जैसे घर को जीवंत बना रही थी। “देख अनुजा,” राधिका ने मुस्कुराते हुए कहा, “इस बार तेरे … Read more

error: Content is protected !!