बस, अब बहुत हुआ – विमला गुगलानी : Moral Stories in Hindi
“ओफ्फ हो, ये महुआ को भी आज ही बीमार होना था” खनक आटा गूथंते गूथंते बुदबुदाई। आटे की और ध्यान दिया तो दूध उफनते उफनते बचा और उसे तो याद भी नहीं कि कूकर कब से गैस पर चढ़ा रखा है। लगता है आलूओं का तो पानी के अंदर ही भुर्ता बन गया होगा। अब … Read more