अस्तित्व – अविनाश स आठल्ये : Moral Stories in Hindi

एंड्रयू जॉनसन एक बहुत बड़े बिजनेसमेन थे, उनके न्यूयॉर्क में ही कई डिपार्टमेंटल स्टोर्स थे, हज़ारों कर्मचारी उनके अधीनस्थ काम करते थे, सैकड़ों मिलने जुलने वाले लोग, फोन कॉल्स और मीटिंग्स में उन्हें 24 घण्टे भी कम पड़ते थे,  इस वजह से एंड्रयू जॉनसन को कभी खुद के और अपने परिवार के लिए वक़्त नहीं … Read more

मेरा अस्तित्व जुड़ो कराटे वाली बहु – डॉ बीना कुण्डलिया : Moral Stories in Hindi

अरेऽऽ ओ सकुनी.. सकुनी, मां ने आवाज लगाई माँ रसोईघर में बर्तन साफ कर रही दुबारा आवाज लगाई अरेऽऽ ओ सकुनी मगर सकुनी को कोई मतलब नहीं वो तो लगी घर के पिछवाड़े में अपने कराटे की प्रैक्टिस करने में हू हा हू हा एक दो वो तो अपने धुन में इतनी मस्त की किसी … Read more

नेह पाती – उमा महाजन : Moral Stories in Hindi

          तुम मेरी बैस्ट हमसफ़र थीं…          प्रिय शुभांगी ! शुभाशीष ! आज सुबह से ही मेरा मन रह- रहकर मुझे समय की दहलीजों को लांघ कर अतीत की ओर ले जा रहा है। जैसा कि तुम जानती ही हो कि कल मेरी रिटायरमेंट थी। रिटायरमेंट का आयोजन खूब अच्छी तरह संपन्न हो गया था। तुमने अपने … Read more

मैं भी हूँ! – मधु पारिक : Moral Stories in Hindi

 एक छोटे शहर की रहने वाली साक्षी बचपन से ही सवालों से घिरी रही — “लड़की हो, ज़्या दा मत उड़ो”, “पढ़-लिखकर क्या करोगी?” और “शादी ही तो करनी है अंत में!” इन सब तानों के बिच उसके मासुम में लेकिन  कुछ और ही चल रहा था — एक आग, जो उसे बार-बार कहती थी: … Read more

यात्रा – पूनम सारस्वत : Moral Stories in Hindi

आज तीसरा दिन था यहां आए हुए । ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं किसी स्वर्ग में आ गई हूं, हर तरफ प्राकृतिक नजारे,रंग बिरंगे मकान और होमस्टे,ऐसे लग रहा था जैसे पथरीले पहाड़ों पर ये बड़े बड़े फूल उग आए हों। इन्हीं में से एक खूबसूरत होमस्टे में मैं ठहरी थी, यहां अक्सर … Read more

बहू का भी अस्तित्व  होता है। – अर्चना खण्डेलवाल Moral Stories in Hindi

निधि जल्दी से सामान बांध लो हम कल शाम की गाड़ी से घर जा रहे हैं, मम्मी की तबीयत ठीक नहीं है, रितेश ने फोन पर कहा। लेकिन रितेश मेरी शाम को जरूरी मीटिंग है, जिसकी तैयारी मैं पिछले एक महीने से कर रही थी और उसमें मेरी प्रजेंटेशन भी है तो मै तो नहीं … Read more

अंगारे उगलना – महजबीन सिराज : Moral Stories in Hindi

सुनीता ज़ोर ज़ोर से उषा मासी पर चिल्ला रही थी। “तुमने मेरी 25000 की ड्रेस जला दी। कोई काम तुम्हें ठीक से नहीं आता। कभी देखी हो इतनी महंगी ड्रेस तो जानो ? ” सुनीता अभी  दो महीने पहले ही इस घर में बहू बन के आई थी। बड़े बाप की बिगड़ी बेटी थी।बहुत घमंडी … Read more

*जीवन की सांझ में उजास* – प्रतिमा पाठक : Moral Stories in Hindi

प्रकृति की अनुपम छटा बिखेरता  छोटा सा गाँव सोनपुर अपनी रमणीयता के लिए प्रसिद्ध था।गांव के अंतिम छोर पर बसी छोटी-सी कुटिया में  निर्मला दादी अकेली रहती थीं। उम्र की सांझ ढल रही थी, लेकिन चेहरे पर  अब भी जीवन का सूरज चमकता था। रोज सुबह तुलसी में जल देकर, मिट्टी के दीयों से घर … Read more

अस्तित्व की गूँज – डॉ० मनीषा भारद्वाज : Moral Stories in Hindi

ऑफिस की चौथी मंजिल पर, अमर की उँगलियाँ कीबोर्ड पर थिरक रही थीं, पर उसका मन कहीं दूर, शायद उसके भीतर की किसी खाली गुफा में भटक रहा था। स्क्रीन पर नंबरों और चार्टों की भीड़ थी। एकाएक, उसकी उँगलियाँ ठिठक गईं। एक विचित्र प्रश्न, जैसे कोई चट्टान टूटकर गिरा हो, उसके मस्तिष्क में आ … Read more

दूरदृष्टा पिता – शुभ्रा बैनर्जी : Moral Stories in Hindi 

“सुनो नीरा,अपने लाड़ले से कह देना।अब घर खर्च थोड़ा बढ़ा दे,पत्नी आ गई है घर में।मुझसे उम्मीद ना रखे कि मैं उसका भी खर्च उठाऊंगा।और हां,बिजली का बिल,गैस सिलेंडर,और साप्ताहिक बाजार की जो जिम्मेदारी सौंपी है मैंने उसे,वो वैसी ही रहेंगी।” निरंजन जी की कर्कश आवाज सुनकर नीरा को बहुत बुरा लगा आज।अभी -अभी तो … Read more

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