“रेखाएं जो जोड़े रखती हैं” – रेखा सक्सेना : Moral Stories in Hindi

रायन और श्रुति – एक परफेक्ट कपल कहे जाते थे। दोनों ही मल्टीनेशनल कंपनियों में ऊँचे पदों पर थे, आधुनिक जीवनशैली जीते थे और स्वतंत्र सोच के समर्थक भी थे। शादी को पाँच साल हुए थे, पर अब रिश्ते में वो गर्माहट नहीं रही जो शुरू के दिनों में थी। शुरुआत में सब कुछ अच्छा … Read more

घर बनाम आश्रम – कंचन श्रीवास्तव आरज़ू : Moral Stories in Hindi

———————– सामान उठा कर जाते जाते उसकी नज़र अपने पति की तस्वीर पर पड़ी और पड़ते ही उसे उसके बीत दिन एक रील की तरह मन मस्तिष्क में घूमने लगे कितने अरमानों से शादी  करके घर बनाया थी ।पर क्या पता था कि बढ़ती उम्र के साथ इतना कुछ बदल जायेगा। कहते है ना कि … Read more

“रंगोली रिश्तों की” – कमलेश आहूजा : Moral Stories in Hindi

मीना का भरापूरा परिवार था| अधिकतर सभी रिश्तेदार शहर में ही रहते थे।सास-ससुर के जाने के बाद भी उसने सबसे व्यवहार बनाकर रखा था। मिलनसार होने के कारण मीना के घर रिश्तेदारों का आना-जाना लगा रहता था।मीना ने अपने बेटे रोहित की शादी बड़ी धूमधाम से की थी।बहु नैना को भी वह बहुत प्यार करती … Read more

“रिश्तो की मर्यादा” – सरोजनी सक्सेना : Moral Stories in Hindi

रघुनाथ जी गांव के जाने-माने किसान हैं ।उनके पिताजी का काफी समय से पुश्तैनी संयुक्त परिवार रहा है । अब पिताजी रहे नहीं । रघुनाथ जी दो भाई छोटे भाई हरि कृष्ण, उनकी पत्नी राधा रानी । हरि कृष्ण जी के दो बच्चे एक बेटा राजू एक बेटी राज । बेटा तो अभी पढ़ रहा … Read more

रिश्तों की मर्यादा – सीमा प्रियदर्शिनी सहाय

“देखो शुभी यह क्या है मेरे पास!” ,शुभी का पति शुभम मुस्कुराते हुए कमरे में आया। उसे मुस्कुराते हुए देखकर शुभी ताजुब में पड़ गई “ऐसा क्या हो सकता है?” वह सब काम छोड़कर उसके पीछे पीछे गई “क्या है दिखाओ?” “नहीं ऐसे नहीं शुभम ने अपने हाथ पीछे कर लिया। “ नहीं मुझे दिखाओ … Read more

संकीर्ण मनोवृत्ति का ज़हर – रत्नापांडे

मिश्रा जी का परिवार तीन पीढ़ियों के इर्द-गिर्द घूमता, रिश्तों की बारीकियों को समझता हुआ एक सामान्य परिवार था। जिसमें सब कुछ बिल्कुल वैसा ही था जैसा आम तौर पर होता है। लड़ना-झगड़ना, प्यार सब कुछ था। सास-बहू के बीच तकरार भी वैसी ही थी जैसी अधिकांश परिवारों में रोजमर्रा की जिंदगी में होती रहती … Read more

क्या मैंने गलत किया? – पुष्पा जोशी   

उम्र के इस पड़ाव पर जब  सब कुछ सामान्य चल रहा है, एक प्रश्न को लेकर मेरे मानस में हमेशा मंथन चलता रहता है कि मैंने रिश्तों की मर्यादा निभाई या नहीं? परिवार से अलग होकर क्या मैंने गलत किया? कहने के लिए मैं परिवार से अलग हो गई, मगर मेरे जीवन में उनका महत्व … Read more

रिश्तें और प्रथा –  उषा वेंकटेसन

रेखा  ने धीरे से अपनी आंखें खोली !  ऐसा लग रहा था की पूरा कमरा घूम रहा है । वह सुस्त और कमजोरी महसूस कर रही थी। वह जानती थी कि उसे उठकर खाना बनाना है। “दादी उठ गयी! दादी  उठ गयी!” उसका पोता दौड़ते हुआ अपने पप्पा को बता रहा था। चिंतित अमित कमरे … Read more

मैं तो मज़ाक कर रही थी-रोनिता कुंडु

लतिका! मासी जी आई है, चाय नाश्ता लेकर आना। आशा जी ने अपनी बहू लतिका को आवाज़ लगाई। थोड़ी ही देर बाद, लतिका चाय और नमकीन लेकर आती है, जिसे देखकर आशा जी कहती हैं, यह क्या बस नमकीन? पकौड़े ही तल लेती? पर उसमें तो मेहनत लगती है, तो फिर कामचोरी कैसे हो पाती? … Read more

हर रिश्ते की एक मर्यादा है-संगीता अग्रवाल

” श्रुति बेटा तैयार हुई की नही लड़के वाले आते ही होंगे !” सरिता ने बेटी को कमरे के बाहर से आवाज़ दी । ” हां मम्मी हो गई !” ये बोल श्रुति ने दरवाजा खोल दिया। ” नज़र ना लगे मेरी बेटी को कितनी सुन्दर लग रही है !” ये बोल सरिता ने उसके … Read more

error: Content is protected !!