बिटिया का घर बसने दो -के कामेश्वरी :  Moral Stories in Hindi

सावित्री दस दिन से शापिंग करने में व्यस्त थी साथ ही …… अपनी पल्लू से आँसू पोंछती जा रही थी क्योंकि ……उसकी बेटी रत्ना की बिदाई जो है । वह बहुत कुछ अपनी बेटी को देना चाहती थी ……इसलिए जितना भी खरीदती थी उसका दिल नहीं भरता था । यहाँ तक ठीक है ….. लेकिन … Read more

राखी का रिफंड और मीठी खटास का बंधन –  डॉ० मनीषा भारद्वाज :  Moral Stories in Hindi

राखी की सुबह थी। सूरज की किरणें खिड़की से झांक रही थीं, मानो चांदी के धागों को सुनहरे रंग में रंगने आई हों। लेकिन मिष्टू के कमरे का माहौल उतना उज्ज्वल नहीं था। दस वर्षीया मिष्टू, जिसके चेहरे पर आमतौर पर चावल के दाने जैसी मासूम मुस्कान खिली रहती थी, आज बिल्कुल बादलों से घिरे … Read more

समझदार बहन – शुभ्रा बैनर्जी :  Moral Stories in Hindi

माता-पिता की सड़क दुर्घटना में असामयिक मृत्यु हो जाने के कारण दुर्गा और उसका बड़ा भाई अनाथ हो चुके थे।पिता दीनदयाल जी का भरा -पूरा संयुक्त परिवार था।घर के बड़े बेटे होने का फर्ज उन्होंने खूब निभाया था। दुर्गा की दो बहनों की शादी उन्होंने ही करवाई थी।अपने छोटे भाई को पुत्र समान स्नेह देकर … Read more

जाहिल – करुणा मालिक :  Moral Stories in Hindi

भाभी , सुबह का खाना तो ज्यों का त्यों रखा है । अब बनाऊँ  या नहीं ?  पड़ा है तो बनाने की क्या ज़रूरत है …….. हाँ आशी , ज़रा एक कप गर्म चाय बना दो । गाड़ी पार्क करते- करते कपड़े सील गए , पता नहीं ये बारिश की टिप- टिप कब बंद होगी … Read more

ब्लैक कॉफी –  हेमलता गुप्ता :  Moral Stories in Hindi

मिताली.. चार कप ब्लैक कॉफी विदाउट शुगर  फटाफट से ले आओ मेरे दोस्तों को जाने की जल्दी हो रही है! जी अभी लाई… कहकर मिताली रसोई में ब्लैक कॉफ़ी की तैयारी करने लगी काफी देर तक सोचने के बाद भी उसे समझ नहीं आया ब्लैक कॉफी कैसे बनाई जाती है उसने तो कोल्ड कॉफी और … Read more

रक्षाबंधन – के आर अमित :

आज सुबह से ही हड़बड़ाहट में लग रहे हैं  चेहरे पे खुशी है पर घबराहट में लग रहे हैं खुद ही खुद से करके बाते मुस्कुराने लगते जाने क्यों दादाजी बड़बड़ाहट में लग रहे हैं। चश्मा साफ करके कभी रास्ता ताक रहे हैं तो कभी दीवार पे टँगी घड़ी को झांक रहे हैं कभी खो … Read more

पापा की परी – विमला गुगलानी :Moral Stories in Hindi

    कामिनी दो कप चाय लेकर बाहर लान में ही ले आई जहां देवेश अखबार लेकर बैठे थे। अखबार सामने रखा था मगर देवेश का ध्यान कहीं और ही था।  “ चाय”, कामिनी ने देवेश के हाथों में कप पकड़ाते हुए कहा। “ओह, हाँ” कह कर देवेश ने अखबार एक और रखते हुए कप पकड़ लिया … Read more

आन, कसम से बड़ा भाई -बहन का प्यार – लतिका पल्लवी  :  Moral Stories in Hindi

आरती की मकान मालकिन की बेटी प्रिया जो कि दसवीं कक्षा मे पढ़ती थी वह प्रतिदिन उसके घर उसकी बेटी के साथ खेलने आती थी साथ ही पुरे मुहल्ले की खबर भी आरती को देती।आरती की बेटी तीन वर्ष की थी जिसके साथ प्रिया को खेलना अच्छा लगता था।आज जब दोपहर  मे स्कूल से आने … Read more

मन का टूटना – लतिका पल्लवी :  Moral Stories in Hindi

संध्या के जेठ जी जैसे ही अपने कमरे से बाहर आए, बाहर उनका बेसब्री से इंतजार करने वाली संध्या नें उनसे पूछा दीदी की तबियत ठीक नहीं है क्या? कल शाम को तो वो ठीक थी।रात का खाना भी बनाया था।तबियत का क्यों पूछ रही हो? नहीं, ऐसा कुछ नहीं है। दीदी अभी तक उठी … Read more

वह ज़माना और था -रोनिता कुंडु :  Moral Stories in Hindi

निशा! कहां हो दोनों? जल्दी बाहर आओ नकुल ने चिल्लाते हुए कहा, अरे आ रही हूं! आ रही हूं! इतना भी क्या चिल्ला रहा है? अब जवान तो रही नहीं कि तू बुलाया और मैं दौड़ते हुए आ जाऊं? नकुल की मां ममता जी बड़बड़ाती हुई अपने कमरे से आती है और फिर नकुल की … Read more

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