अध्याय-1 :  भैरोगंज रेलवे स्टेशन – नीरज श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

रात के दो बज रहे थें। कोहरे ने दूर-दूर तक अपना आतंक फैला रखा था। हाड़-माँस को कपा देने वाली सर्द हवायें बेकाबु हो यहाँ-वहाँ भटक रही थीं। इन सब से अन्जान, बेखबर कोई भैरोगंज रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नं. 01 पर खुद को एक पतले से साँल में समेटने की नाकाम कोशिश कर रहा … Read more

जब तुम मां बनोगी तो पता चलेगा – सीमा सिंघी : Moral Stories in Hindi

 मेरे हाथों में तेल का कटोरा देखते ही सखी मुझसे कहने लगी ! दादी मैं तो अभी बालों में तेल नहीं लगाऊंगी! यूं तेल लगाकर कॉलेज जाने से मेरी सारी सहेलियां मुझ पर हंसती है ! जिस दिन घर पर रहूंगी तो मैं आपसे जरूर लगवा लूंगी कहकर वो कॉलेज के लिए निकल पड़ी!   सखी … Read more

जब तुम माँ बनोगी, तब पता चलेगा – लक्ष्मी त्यागी : Moral Stories in Hindi 

सुनीता एक महीने से, अपने घर पर ही, रह रही थी, उसकी मम्मी परेशान थीं, कि अब बेटी का इतने दिनों तक मायके में रहना उचित नहीं है। वो चाहती थीं कि उसे अब अपने घर चले जाना चाहिए किन्तु कह भी नहीं पा रहीं थीं ,कहीं बेटी को बुरा न लगे ,कि अब ये … Read more

वो काली रात – प्रतिमा पाठक : Moral Stories in Hindi

कहाँ खोई हो वसुधा…?कहता हुआ राज उसके पास पहुच गया,पर वसुधा तो अपनी ही धुन में खोई हुई थी , उसे राज के आने की भनक भी न हुई।तभी राज ने उसके कंधा पर हाथ रखा तो वसुधा की तंद्रा टूटी। क्या हुआ फिर वही सब सोच रही हो?क्यों तुम बार बार एक ही बात … Read more

काली रात – अनामिका मिश्रा : Moral Stories in Hindi

रौशनी मध्यम वर्गीय परिवार से थी।माता-पिता और एक छोटा भाई उसके परिवार में थे। रौशनी पढ़ाई के साथ-साथ प्राइवेट जॉब कर रही थी।पिताजी की सरकारी नौकरी थी,उसी में गुजर बसर हो रहा था। मां रौशनी से- “‘इतनी रात को श्वेता ने तुझे अपने घर बुलाया है,और तू जाने को तैयार भी हो गई,उसका घर जानती … Read more

 इंसानियत जिंदा है – सविता गोयल :

 Moral Stories in Hindi कमली अपने दो साल के बच्चे को गोद में उठाए भागती जा रही थी। अंधेरा गहराता जा रहा था और बारिश भी अपना पूरा जोर लगाए हुए थी| सुनसान सड़क कोई दुकान भी खुली नजर नहीं आ रही थी| अपनी पुरानी घिसी हुई साड़ी से बच्चे को ढकने की नाकाम कोशिश … Read more

किस्मत

 Moral Stories in Hindi औरत कितनी भी मजबूर हो,निष्ठुर हो पर वो हार जाती है ।हां हार , उससे जिसे ………। सोच ही रही थी कि सुधीर की आवाज़ सुनाई पड़ी ।सुनती हो ज़रा इधर तो आना देखो ना दवाई की सीसी नही खुल रही …और वो सुन कर भागी भागी गई उस इंसान के … Read more

काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती – डॉ आभा माहेश्वरी : लघुकथा

एक गाँव के पास एक छोटा सा बाजार था। वहाँ एक चालाक व्यापारी, मोहन, हर हफ्ते नया बहाना बनाकर ग्राहकों को ठगता। कभी कोई मसाला लाता और कहता, “यह मसाला विदेश से आया है,” तो कभी “यह तेल जड़ी-बूटियों से बना है, जटिल रोगों का इलाज होता है इससे।” सीधेसादे लोग उसके झाँसे में आ … Read more

जब तुम माँ बनोगी, तब पता चलेगा” – डॉ आभा माहेश्वरी : Moral Stories in Hindi

“माँ, आप हर बात पर रोका टोकी क्यों करती हैं? मुझे अपनी ज़िंदगी अपने हिसाब से जीने दीजिए!”— मीनू ने गुस्से में कहा और कमरे का दरवाज़ा ज़ोर से बंद कर लिया। माँ– सौम्या शांत खड़ी रहीं।उसने कोई जवाब नहीं दिया। ये पहली बार नहीं था जब मीनू ने ऐसा बर्ताव किया था।मीनू 25 साल … Read more

माँ का त्याग – नीरज श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

जब तुम माँ बनोगी तब पता चलेगा कि माँ का दर्द क्या होता ? औलाद को एक खंरोच भी आ जाये तो माँ का हृदय वेदना की दर्द से छलनी-छलनी हो जाता है। राधिका अपनी बात पूरी कर पाती उससे पहले ही रेवती ने जोर से किवार बंद किया और कमरे से बाहर चली गई। … Read more

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