जूते…!! – विनोद सिन्हा “सुदामा”

नमन सुबह से मुँह फुलाए बैठा था.! माँ संगीता के लाख कहने पर भी वह न तो कुछ खा रहा था और ना ही पी रहा था बस जिद्द पर अड़ा एक ही रट लगाए था कि… मुझे नये जूते ला दो.! मुझे नये जूते ला दो.!! माँ बेचारी कहे जा रही थी..! बेटा अभी … Read more

बुलबुल* – अनु मित्तल  ‘ इंदु’

बात पांच साल पुरानी है ।मेरी बेटी की शादी हो गई थी ।  हमारे घर के पिछले स्टोर में से कुछ आवाजों ने हमें चौंका दिया । मैंने अपनी नौकरानी सुंदरी से कहा कि ज़रा स्टोर में देखो क्या आवाजें आ रही हैँ । हमने देखा कि एक बड़े से कुशन  पर बिल्ली के चार … Read more

यह अंत नहीं जीवन का”-तृप्ति उप्रेती

“पापा, आज बिजली का बिल भर दीजिएगा”। विहान ऑफिस जाते हुए सुरेश जी से बोला। सुरेश जी लाॅन में बैठकर चाय पी रहे थे। तभी सुहानी बाहर आई और उन्हें एक कागज देते हुए बोली, “पापा जी, जब आप बिल भरने जाएंगे ही तो यह राशन के सामान की लिस्ट भी किराने वाले को दे … Read more

भाभी की सीख – अनुपमा

मानसी मानसी कहां हो , जल्दी बाहर आओ तुम्हे कुछ दिखाना है । आशु आवाज देता हुआ सीधे मानसी के कमरे मैं चला गया और उसे लगभग खींचता हुआ बाहर ले आया और उसे अपनी नई बाइक दिखाने लगा । मानसी और आशु पड़ोसी थे ,साथ है बचपन से , नर्सरी से कॉलेज भी साथ … Read more

वो बदनाम गलियां – संगीता अग्रवाल

क्या ये बदनाम गलियां ही अब मेरा मुकदर होंगी… क्या मैं कभी खुल कर नही जी पाऊंगी….क्या मुझे यहीं घुट घुट कर जीना पड़ेगा । मेरा नाम मेरी पहचान मेरा वजूद सब खो जायेगा..,? कांता बाई के कोठे के अंधेरे कमरे में पड़ी सत्रह साल की वैशाली ये सब सोच रही थी। वो जितना इस … Read more

स्वार्थी – अनुज सारस्वत

******** “चल बेटा तैयार हूं मैं, गंगा मैया की बड़ी कृपा है ,बुला ही लेती हैं ,और देखो तेरी पोस्टिंग भी अपने किनारे करवा ली ,यह संयोग नही है” बाईक पर बैठते हुए जयंत की माँ ने कहा “अरे मम्मी आप मेरे साथ ही रहा करो कितनी बार कहा है ,लेकिन आपको वही पुराना घर … Read more

 नयी सुबह – नीरजा रजनीश जायसवाल

नींद सुनन्दा की आंखो से कोसों दूर थी ।पलंग पर करवटे बदलते हुए अपने कानों में गूंजती स्निग्धा की आवाज़ उसे बार बार आहत कर रही थी “मम्मा अगर आज पापा होते तो भी क्या मेरी यही हालत होती? “ बिटिया का ये सवाल उसे बार बार ग्लानि का अनुभव करा रहा था विगत चार … Read more

 मेरी -भाभी –     सीमा वर्मा

आज पूरे चौबीस घंटे के बाद बुखार टूटा है। सारा बदन जैसे दर्द में जकड़ा हुआ सा है कुछ समझ नहीं पा रहा था आखिर हुआ क्या है मुझे ? रुचिका ने कमरे के बाहर से दरवाजे पर ही खड़ी हो कर बताया , ” यों तो डरने वाली बात नहीं है लेकिन संपर्क से … Read more

स्वयं सिद्धा.(भाग 2) –  प्रीती सक्सेना

 भाग 1   समर,,,, आज मैं,, मेरा अस्तित्व,, तुमसे पूरी तरह जुदा हो गए, तुम्हारा नाम,, मेरे नाम के साथ जुड़ा हुआ नहीं रहा,, मैने तुम्हें और तुम्हारी यादों को मलिन कपड़ों की भांति,, अपने बदन से उतारकर,, दूर फेंक दिया,, अब मैं अपने को बहुत हल्का महसूस कर रही हूं। आज संडे है,, काफी दिन … Read more

फीस – रीता मिश्रा तिवारी

**** आज स्कूल गई और जब अपने क्लास में गई तो सौम्या नज़र आई । वो पढाई में बहुत ही होनहार और साथ ही नृत्य और टेनिस में भी बहुत अच्छी छात्रा है।  परीक्षा के दौरान वो बीच में ही परीक्षा छोड़ गायब हो गई। मुझे थोड़ी चिंता भी हुई की ऐसी क्या बात हो … Read more

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