रोली – चेतना

रोली, तुम्हें इनमें जो भी ड्रेस पसंद हो ले लो…” रोमिला ने अपनी भतीजी से कहा जो उसके साथ बाजार आई थी। “क्या सच बुआ जी, मैं ये ड्रेस ले सकती हूँ…” बुआ की बात सुनते ही रोली के चेहरे पर चमक आ गई। “हाँ, क्यों नहीं ले सकती। मैं तुम्हें इसीलिए तो अपने साथ … Read more

व्यथा – नीलिमा सिंघल

बीना आज बहुत उदास थी कोई भी नहीं था जो उसके दिल की व्यथा समझ पाता, कितना भरोसा किया था उसने शिखा पर,  8 साल की दोस्ती…… लगता था जैसे कल की ही बात हो,  बीना ब्याह के बाद एक बार मायके से दूसरी बार ससुराल से विदा होकर नोएडा से अहमदाबाद आयी थी विदा … Read more

लोटा और बेटा – नीरजा कृष्णा

आज पूरे गाँव में कानाफूसी चल रही थी। सूरज बाबू का बड़ा बेटा हिमालय पर कठोर तपस्या करके ढेरों सिद्धियां प्राप्त करके अचानक लौट आया है। हल्की फुल्की खबर ये भी है कि सूरज बाबू उसके इस तरह लौटने से जरा भी खुश नहीं है…चौपाल में मंडली जमी थी। गिरधारी बाबू कह रहे थे,”सुना है…मानस … Read more

नीम की छांव – वंदना चौहान

ट्रीन, ट्रीन , ओह!  डोर वेल , आई बाबा । गेट खुलते ही रमन का गले में बाहें डाल कर,” आई हैव अ सरप्राइज फॉर यू।”  क्या बात है ? पापा, पापा पहले हम सुनेंगे सरप्राइज।  दोनों बच्चे अपना-अपना गेम छोड़कर दौड़ते हुए गेट पर आ गए । हाँ,हाँ सब को एक साथ बताऊँगा, चलो … Read more

बदनाम मायका – अनुपमा

शशि और कांता की उम्र मैं ज्यादा फासला तो नही दिखता था , होगा यही कोई दस बारह साल का अंतर अंदाजन , स्वभाव मैं बिलकुल विपरीत थी दोनो ,कोई नही जानता था क्या रिश्ता था दोनो का पर जिसने भी उन्हे यहां देखा एक दूसरे के आसपास ही देखा । शांति से हर कोई … Read more

बेटियाँ तो अभिमन्यु पैदा होती हैं – नीरजा कृष्णा

गौरांग वर्क फ्रॉम होम कर रहा हैआजकल। विनीता बहुत कुशल गृहिणी है।वो शाम को चाय और पकोड़े बना कर ले आई..”अरे! आजकल तुम्हारी तबियत ठीक नही है, तुम इतना काम अकेले मत किया करो प्लीज़! मेरा ऑफ़िस का काम भी बस खत्म ही हो रहा था ! अच्छा खैर, बैठो ,चाय साथ में पीते हैं।” … Read more

भूकंप – भगवती सक्सेना गौड़

सब सहेलियां साथ ही स्कूल जाती थी, दो किलोमीटर की दूरी थी। गप शप, मस्ती करते हुए वो दूरी उन्हें पता ही नही चलती थी। राह के लोगो पर फब्तियां कसती आगे बढ़ती जाती थी। रोज एक रिकशे मे पतली सी महिला को सिर झुकाए जाते देखती थी, उसे देखते ही रोजी गुनगुनाने लगती, “न … Read more

चरणस्पर्श – दीप्ति सिंह (स्वरचित व मौलिक)

 “फेरों के बाद वर-वधू अब गौरी-शंकर का रूप में है वधू के माता-पिता दोनों के चरणों को जल से प्रक्षालन करके चरणस्पर्श करेगें ” पंडित जी बोले। ” पंडित जी !फिर तो मेरे माता-पिता को भी हम दोनों के चरणस्पर्श करने चाहिए उन्हें भी गौरी-शंकर का आशीर्वाद मिल जाएगा। ” आर्यन बोला “नही! यह रस्म … Read more

जीवनचक्र – डॉ. पारुल अग्रवाल

संदेश देने के लिए सोशल मीडिया पर छाए हुए थे। दूसरी तरफ दिनेश बैठा हुआ अपने पिछले दिनों को याद कर रहा था, जब उसकी मां बिस्तर पर थी और जीवन-मृत्यु के बीच जंग लड़ रही थी तो उसकी पत्नी और वो अपनी ही दुनिया में व्यस्त थे। वो किडनी के दर्द से तड़फती रहती … Read more

मायका टूरिस्ट  प्लेस  से  भी आगे – उमा वर्मा

मायका टूरिस्ट  प्लेस  से  भी आगे बहुत कुछ है ।यादों के खजाने में असीमित भंडार  भरे पड़े हैं ।किसे याद करें किसे छोड़ दे।नहीं छोड़ देने  जैसा कुछ भी नहीं है ।किसे मायका कहें? वह छःदशक पहले वाली? वह गांव देहात में खूब बडा सा हवेली नुमा  घर ।जहां पूरा कुनबा समाया रहता था ।दादा … Read more

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