फ़ैसला – डॉ पुष्पा सक्सेना : Moral Stories in Hindi

पिछले दो दिनों से अपना कमरा बंद किए पड़ी नीलांजना,  अचानक दरवाजा खोल, बाहर आ खड़ी हुई थी- ”बाबूजी, मैंने फ़ैसला कर लिया है, मैं काजल भाभी का साथ दूंगी। अदालत में उनके पक्ष में गवाही दूंगी।“ नीलांजना की घोषणा से पूरे घर में सन्नाटा खिंच गया । बड़े भइया की मृत्यु पर मातमपुर्सी करने … Read more

एक शिक्षिका ऐसी भी….. – अमिता कुचया : Moral Stories in Hindi

शीतल शहर से गांव के स्कूल के लिए बस से आती और गांव के मेन रोड से अंदर सरकारी शाला में ढाई किलो मीटर तक चलकर पहुंचती, जैसे ही स्कूल लगता तो तब बच्चे उसे कक्षा में आते देख कहते देखो – देखो शीतल मेडम आ रही है, सब बस्ता खोलकर बैठ जाते। इतना उत्साह … Read more

कुछ तो लोग कहेंगे – के . कामेश्वरी :  Moral Stories in Hindi

पूजा कॉलेज से खुशी खुशी गाना गुनगुनाते हुए घर में कदम रखती है । वह अपनी ही धुन में थी । उसने जैसे ही बैठक में कदम रखा देखा , कुछ नए लोग बैठे हुए थे । उन्हें देख कर नमस्ते कहते हुए अपने कमरे में भाग गई । उसे समझ में नहीं आ रहा … Read more

अब से मैं ही आपका बेटा हूँ मां…… – सिन्नी पाण्डेय :  Moral Stories in Hindi

वंदनाजी अपने 9 साल के पोते को स्कूल वैन में बैठाकर अंदर आईं और अपने कमरे में निढाल होकर बैठ गईं। बहू नीलू आज दो महीने की छुट्टी के बाद स्कूल गई थी,वो एक प्राइवेट स्कूल में अध्यापिका थी। नीलू के जाने से वंदना जी का दिल घबरा रहा था,उनको अपना ही घर काटने को … Read more

आंखों में धूल झोंकना – गीतू महाजन :  Moral Stories in Hindi

मां के लिए नया मिक्सर ग्राइंडर..पिता के लिए नई कमीज़ और छोटे भाई बहनों के लिए तोहफे देखकर देवांग के पिताजी का माथा ठनका और उन्होंने उससे पूछ लिया,”क्या तुम्हारी तनख्वाह इस बार जल्दी मिल गई है जो यह सामान ले आए हो..अभी पहली तारीख आने में तो 10 दिन बाकी हैं”।  “नहीं पिताजी, मेरे … Read more

कुछ तो लोग कहेंगे – विनीता सिंह :  Moral Stories in Hindi

लखनऊ शहर एक नवाबों का शहर है इसी शहर से दूर एक गांव में ठाकुर सूरजप्रतप सिंह जी की हवेली थी। जो कि पहले जमींदार थे लेकिन जब भारत आजाद हुआ उसके बाद में सब की जमीदारी खत्म हो गई हवेली के बहुत बड़े-बड़े फाटक लेकिन उसके अंदर जो जिंदगी थी उसकी कहानी है। सूरज … Read more

कुछ तो लोग कहेंगे !! – स्वाती जैन :  Moral Stories in Hindi

कुछ तो गड़बड़ हैं शालू की मां ,वर्ना इतने दिन शालू हमसे बात किए बिना रह ही नहीं सकती , चार दिन हो गए शालू हमारा फोन नहीं उठा रही और ना वापस फोन कर रही हैं , दामाद जी को फोन किया तो कह रहे थे शालू की थोड़ी तबीयत खराब हैं इसलिए वह … Read more

कुछ तो लोग कहेंगे – ज्योति आहूजा

रसोई से आती हल्दी और मसालों की खुशबू के बीच संध्या बरसों से अपने दिन की शुरुआत करती रही। सुबह की चाय से लेकर रात के खाने तक, बच्चों की पढ़ाई से लेकर पति अमित की जिम्मेदारियों तक, उसने अपनी पूरी ज़िंदगी घर और परिवार में समर्पित कर दी। अमित इंदौर में एक अच्छी नौकरी … Read more

विश्वासघात – उमा वर्मा

अजी सुनती हो,शोभा का रिश्ता तय करके आया हूँ “राघव जी ने पसीना पोछते हुए अपनी पत्नी गीता को पुकार कर कहा ।”कहाँ तय कर दिया? कुछ बताया भी नहीं “गीता अचानक खुशी से अकबका गई ।”अरे वो शुक्ला जी हैं न, रामपुर वाले,उन्ही का बेटा है श्याम उसी से बिना लेनदेन के बात पक्की … Read more

ये गवार औरत मेरी मां है। – दीपा माथुर

शाम का वक्त था। बड़े-बड़े झूमर जल उठे थे और घर में हर ओर हलचल थी। कीर्ति इधर-उधर दौड़ रही थी, कभी किचन में जाती, कभी हॉल में सजावट देखती। गुब्बारे, रंग-बिरंगे पर्दे, फूलों की खुशबू और तरह-तरह के पकवान—सबकुछ मिलकर घर को एक महफ़िल बना रहे थे। आज विभु का जन्मदिन था। उसकी कामयाबी … Read more

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