ये गवार औरत ,मेरी माँ है। – लक्ष्मी त्यागी :  Moral Stories in Hindi

गौरव बड़े परिश्रम से पढ़ता था, ताकि वह अपनी माँ की उम्मीदों पर खरा उतर सके,उनके अरमानों को पूर्ण कर सके ,उसकी माँ बड़े परिश्रम से और लोगों से ऋण लेकर, उसे पढ़ा -लिखा रही थीं। गौरव के पिता एक अच्छी कम्पनी में  कार्यरत थे , उनके घर में खूब खुशियां और शांति थी। उन्हीं … Read more

झूठा जाल – ज्योति आहूजा :  Moral Stories in Hindi

सुबह की चाय के बाद नीलिमा रोज़मर्रा के कामों में लगी ही थी कि अचानक दरवाज़े की घंटी बजी। बाहर खड़े थे एक आदमी और एक औरत। उनके हाथों में कई बोतलें और पैकेट थे। चेहरे पर मुस्कान और आवाज़ में इतना भरोसा कि कोई भी तुरंत प्रभावित हो जाए। “मैडम, ये देखिए नया फ्लोर … Read more

मेरा घोंसला मत उजाड़ो…… – सिन्नी पाण्डेय :  Moral Stories in Hindi

महेन्द्र बाबू गांव के जाने माने जमींदार थे। हज़ारों स्क्वायर फ़ीट में फैली ज़मीन के बीचों बीच उनकी आलीशान कोठी बनी थी और बाहर क्यारी के पास की ज़मीन पर एक बड़ा सा आम का पेड़ लगा था जो बहुत सारी गौरैया,तिलोरी और फ़ाख्ता चिड़ियों का घर था। दिन भर चिड़ियों की चहचहाट से वातावरण … Read more

गंवार माँ – अर्चना खण्डेलवाल :  Moral Stories in Hindi

शिरीष मुझे थोड़े रूपये और दे दो, मुझे आज शॉपिंग पर जाना है, शाम को वर्षा और मुक्ता आ रही है, तो बहनों के साथ मैं भी चली जाऊंगी, कुछ मनपसंद का ले आऊंगी, चारू ने खुशी से कहा पर उसकी बातें सुनकर शिरीष का चेहरा उतर गया। क्या हुआ? तुम इतने उदास क्यों हो … Read more

ऐसे भी सास ससुर होते हैं – गीतू महाजन :  Moral Stories in Hindi

“जवान बेटे की मौत का ज़रा भी दुख नज़र नहीं आ रहा है इनके चेहरे पर और तो और बहू को भी साथ लिए बाज़ार में घूम रही है”, आरती ने अपने मोहल्ले में रहने वाली रजनी जी और उसकी बहू प्रिया को देख कर कहा जो की बाज़ार से सब्ज़ी वगैरह खरीद कर ला … Read more

वर्चस्व – बीना शुक्ला अवस्थी :  Moral Stories in Hindi

केतकी जी आज सिर नहीं उठा पा रही थीं। सामने घर के सारे लोग बैठे थे, उसे तो उम्मीद ही नहीं थी कि आज उसे सबके सामने इतनी बेइज्जती उठानी पड़ेगी। जब छोटी बहू चंदना विवाह करके घर आई तो केतकी जी खुश नहीं थी। चंदना में कोई कमी न होते हुये भी आम हिन्दुस्तानी … Read more

कामवाली की माँ – रीतू गुप्ता :  Moral Stories in Hindi

भाभी घर का सारा काम हो गया है।अब मैं चलती हूँ । भाभी कल पूरा दिन नहीं रुक पाऊँगी, माँ को दिखाना है। सुबह जल्दी आकर और सारे काम निपटा कर जल्दी ही घर के लिए निकल जाउगी, बाद का आप देख लेना।  अरे पूनम, कल तो मेरी किटी है, और मेरी सारी सहेलियों को … Read more

नई राह – प्रियंका सक्सेना : Moral Stories in Hindi

रामनगर शहर की भीड़भाड़ वाली गलियों में नलिनी जब भी किताबें दबाए निकलती, मोहल्ले में कानाफूसी शुरु हो जाती — “यही है विमल की विधवा!” “विधवा होकर पढ़ाई करने जाएगी ? शर्म नहीं आती इसे ?” “एक महीना नहीं हुआ पति को गुजरे और चल दी मैडम बन-ठन कर। “ लेकिन नलिनी हर आवाज़ को … Read more

पिया जी मैं तो आपको छोड़कर न जाती…… – सिन्नी पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

मंजरी का विवाह एक सम्पन्न परिवार में हुआ था,वह बहुत खुश थी। चूंकि वो एक निम्न मध्यमवर्गीय परिवार से थी,तो उसके लिए यह शादी किसी सपने के पूरी होने जैसे थी। वह सुबह जल्दी उठने से लेकर घर के सारे कार्यों की ज़िम्मेदारी अपने ऊपर ले चुकी थी। सास ससुर संतुष्ट थे उससे, और हों … Read more

लाड़ वाली भाषा – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

क्या जाहिल औरत हो ? कौन दूध में इस तरह उँगली डालकर चेक करता है कि गर्म है या ठंडा ? हज़ार बार कहा है कि मेरे बच्चों के मामले में ये गँवारपन मत दिखाया करो ।  नहीं जी …. मेरे हाथ एकदम साफ़ है । अभी रोटी बनाकर हाथ धोने के बाद ही चौके … Read more

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