यह गंवार औरत मेरी मां है – सीमा सिंघी

अरे मनीष बस दो मिनट और रुक जाओ । मैंने तुम्हारे लिए तुम्हारी ही पसंद के मेथी के पराठे और आलू की सब्जी बनाई है । मुझे आज थोड़ी देर हो गई इसीलिए मैंने अभी तो तुम्हें दही पराठे खिला दिए, मगर अब सब्जी भी लगभग बनकर तैयार हो गई है ।  इसे मैं अभी … Read more

ये गंवार औरत ,मेरी माँ है- लक्ष्मी त्यागी

गौरव बड़े परिश्रम से पढ़ता था, ताकि वह अपनी माँ की उम्मीदों पर खरा उतर सके,उनके अरमानों को पूर्ण कर सके ,उसकी माँ बड़े परिश्रम से और लोगों से ऋण लेकर, उसे पढ़ा -लिखा रही थीं। गौरव के पिता एक अच्छी कम्पनी में  कार्यरत थे ,उनके घर में खूब खुशियां और शांति थी। उन्हीं दिनों … Read more

मानवता – निमिषा गोस्वामी : Moral Stories in Hindi

आज कई वर्षों के बाद शोभित अपने गांव वापस आया। बी-टेक करने के बाद बैंगलोर में एक कंपनी में जॉब लग जाने के बाद से ही वह बैंगलोर में ही था।बस से उतरकर वह गांव  जाने के लिए टैक्सी का इंतजार करने लगा। कुछ देर बाद टैक्सी उसके पास आकर खड़ी हो गई।अरे शोभित भइया … Read more

आंखों में धूल झोंकना – खुशी : Moral Stories in Hindi

ये कहानी नहीं एक सच्ची घटना है जो मैं आप लोगों के साथ साझा कर रही हूं।कहानी के माध्यम से अनिल जी का अपना व्यापार था वो तेल ,गुलाब जल और पेट्रोलियम जेली बनाते थे।उनका कारोबार बहुत अच्छा चल रहा था।दिल्ली के ख।री बावली वो जाते थे अपना सामान खरीदने वही पास की मार्केट में … Read more

आंख में धूल झोंकना – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

अरे अंजना बड़े बेटे की शादी न करके छोटे की कर रही है । पहले बड़े बेटे की शादी करनी चाहिए फिर छोटे की। तभी पास खड़ी रेखा जी ने चुटकी ली,अरे क्या बड़े बेटे की शादी होगी वो कुछ करता धरता है नहीं ,और पता नहीं क्या पढ़ाई की है बस इधर उधर फालतू … Read more

आंखों में धूल झोंकना – हेमलता गुप्ता : Moral Stories in Hindi

पापा.. मुझे शहर में नौकरी मिल गई है पूरे ₹30000 देंगे, अब देखना मैं अपने घर की गरीबी को कितनी जल्दी दूर करती हूं और 1 साल के बाद में जब मेरी जॉब स्थाई हो जाएगी मैं आपको भी वही बुला लूंगी! बेटी पल्लवी की बात सुनकर पिता किशोर बहुत प्रसन्न हुए उन्हें लगा चलो … Read more

यह गंवार औरत मेरी मां है। – मधु वशिष्ठ : Moral Stories in Hindi

      पापा मेरे स्कूल के सारे बच्चों ने स्पाइडर-मैन देख ली है, इस इतवार को हम भी पिक्चर देखने जाएंगे, राहुल  लाड करते हुए पापा से बोला। हां बहुत दिन हो गए, मुझे भी बहुत सा सामान खरीदना है, चलो मैं भी वहां माल के स्टोर से ही कुछ सामान भी खरीद लूंगी, नित्या ने कहा। … Read more

तीन दिनों बाद – परमा दत्त झा : Moral Stories in Hindi

भोपाल के एक बड़े और समृद्ध मुहल्ले में उस दिन अफरा-तफरी मच गई।एक आलीशान कोठी के भीतर से तेज़ बदबू आ रही थी।लोगों ने पहले सोचा कि शायद कोई जानवर मर गया होगा, लेकिन जब बदबू असहनीय होने लगी तो सबको अंदेशा हुआ कि मामला कुछ और है। मुहल्ले वालों ने मिलकर पुलिस को बुलाया। … Read more

सरपंच पति – शिव कुमारी शुक्ला : Moral Stories in Hindi

आज पंद्रह अगस्त की सुबह थी । अन्य दिनों की अपेक्षा आज की सुबह बड़ी खुशनुमा थी। राष्ट्र भक्ति के गीत माहौल को देशभक्ति से ओत-प्रोत बना रहे थे। जहां कुछ बच्चे सफेद यूनिफॉर्म में सजे  पी टी के लिए पंचायत भवन की ओर बढ़ रहे थे तो वहीं दूसरी ओर कुछ छात्रायें  रंग-बिरंगी पोशाकें … Read more

कर्मो का फल – शिव कुमारी शुक्ला : Moral Stories in Hindi

कोटा शहर की एक कॉलोनी जो हाऊसिंग बोर्ड के मकानों से बनी थी। जिसमें लगभग छोटे, मध्य एवं बड़े सब मिलकर लगभग तीन हजार के करीब मकान बने हुए थे। उन्हीं में एक मकान था चिरंजीलाल का जिसमें वह अपनी पत्नी एवं चार बच्चों के साथ सुख पूर्वक रहता था। दो बेटे एवं दो बेटियां। … Read more

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