नीला लिफाफा –  डाॅ उर्मिला  सिन्हा : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi : सासुमां के  तेरहवीं के बाद एक -एक कर मेहमानों का जाना। रह गये हम दोनों पति-पत्नी। बच्चे अपनी जगह पर चले गये।     आज अम्माजी का कमरा साफ कर रही हूं। अस्तव्यस्त अलमीरा में उनके पुराने कपड़े, यादगार वस्तुएं अटरम-पटरम भरा हुआ था। अचानक एक जीर्ण-शीर्ण नीला  लिफाफा नीचे गिर पड़ा। … Read more

  ” पाखी ”  – डॉ. अनुपमा श्रीवास्तवा

सुबह- सुबह एक हाथ में चाय की प्याली और दूसरे हाथ में पानी का ग्लास लिए चाची कमरे में घुसी और जोर -जोर से बोलने लगी, अजी सुनते हैं जल्दी उठिए  पेपर में रमाकांत जी की बेटी का नाम छपा है ।  पूरे जिले में टॉप आई है। नाम रौशन कर दिया माँ- बाप का … Read more

वो लड़की – रेणु सिंह राधे

सुगंधा भागी चली जा रही थी बस के पीछे, घर का काम बच्चे संभालना उस पर नौकरी करना, सब कुछ में वो अपने आप को जैसे भूल ही गई थी। किसी तरह बस पकड़ी ,खचाखच भरी हुई बस में जैसे तैसे खड़े होने की जगह बना पाई । कुछ आवारा जैसे दिखने वाले लड़कों ने … Read more

 ज़िंदगी गुलज़ार है – बरखा  शुक्ला

मै आज बड़ी खुश थी ,क्योंकि दीदी ने बेटे अवि के लिए दो तीन रिश्ते सुझायें थे । बेटी की शादी को तीन साल हो चुके है , वो अपने सास ससुर के साथ दिल्ली में रहती है , दामाद जी मल्टीनेशनल कम्पनी में जॉब करते है । बी .टेक .करने के बाद बेटे को … Read more

श्रृंगार – कमलेश राणा

आज मेरी एक छात्रा ने मुझे एक कहानी भेजी,,मुझे लगा कि उसकी इस प्रतिभा को सबके सामने आना ही चाहिए,,   वह चाहती थी कि मैं इस कहानी की भेजूं,,पर मैं जानती हूँ एक लेखक होने के नाते कि ,,जब कोई आपकी कहानी को अपना नाम देता है तो कितना बुरा लगता है,,   मैंने … Read more

बेटियां – उमा वर्मा

मै कुमुद  सफर कर रही हूँ, अमेरिका के लिए ।वहां मेरी मंझली बिटिया  रहती है ।जहाज अब कुछ ही घंटों में पहुंचने वाली है ।ओह! इतना लम्बा सफर ।कोई उपाय भी तो नहीं है ।जीवन जीने का बस यही एक तरीका बच गया है मेरे लिए ।पिछले यादों का पन्ना खुल गया है ।सत्रह तस्वीर … Read more

सहेली – भगवती सक्सेना गौड़

आज रीना चालीस वर्ष बाद अपने बचपन के शहर झांसी में कुछ सहेलियों के साथ घूमने आई, बहुत अच्छा लग रहा था । हर मोहल्ले , चौराहे को देखकर उसका नाम याद आ रहा था, बहुत कुछ बदल गया था, फिर भी पहचानने में मुश्किल नही हो रही थी। दिल मे दबी ढकी एक इच्छा … Read more

रब ने बनाई जोड़ी – प्रीती सक्सेना

मम्मी पापा की लाडली बेटी दिया,,, भईया की,, लाडली बहन,,, घर की रौनक,,, उसके रहते घर में उदासी कहीं रह भी न पाती,, हमेशा खुशी और हंसी से गुलजार रहता घर। पढाई होते ही,,, लोगों ने पूछना शुरु कर दिया,,, दिया की शादी कब कर रही हो,, मम्मी पापा को तो अपनी गुड़िया,,, छोटी सी,, … Read more

नकटौरा – सुनीता मिश्रा

बारात प्रस्थान कर चुकी थी ,अब घर में औरतें ही थीं। लगातार दो दिनों से विवाह की रस्मों में उलझी,तकरीबन सभी औरतों के चेहरे पर थकान की शिकन स्पष्ट थी। कुछ औरतें मंडप में बिछी जाजमों  पर पसर गईं,कुछ दोने में मोतोचूर के लड्डू और नमकीन सेव ले मंडप के पास बैठकर टूंगने लगीं ।बच्चें … Read more

अंतिम इच्छा एक सत्य कथा – गुंजन आनंद गोगिया

शाम से ही अनीता का मन बहुत द्रवित था।आज उसकी छोटी बेटी का चोला संस्कार था, जिस पर पड़ोस की सारी औरतों ने आकर उसको बातों ही बातों में बेटा ना होने का सुनाया और बधाई भी दी। इन बातों ने उसके मन को बहुत विचलित कर दिया कि अब उसकी सास और ननद उसको … Read more

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