पीहर की सौगात* – किरण केशरे
पिताजी को गुजरे दो माह हो गए थे, माँ तो बचपन में ही गुजर गई थी ,शारदा की , उनके जाने के बाद पहली राखी थी । शारदा पीहर अपने दो बच्चों के साथ आई थी, घर का माहौल थोड़ा बोझिल था। दोनों भाई और भाभी रस्मी तौर पर सामान्य ही बरताव कर रहे थे। … Read more