बेटी  हमारा स्वाभिमान – स्वेता मंजु शर्मा 

एक माँ थी । उसकी तीन बेटियां थीं । माँ बहुत पढ़ी लिखी थी । एकांत के क्षणों में अक्सर अपने पति से सिर्फ एक ही बात कहती थी…. ” हम अपनी बेटियों की शादी सरकारी नौकरी वाले लड़कों से करेंगे. हम इनको खूब पढायेंगे”। सीमित आय में उस माँ ने कभी अपने पति से … Read more

उपहार –  दीप्ति सिंह

रमेश के पास विवाहिता छोटी बेटी प्रभा की पी. एच. डी. पूरी होने का फोन आया ।आशीर्वादों से नहला कर पत्नी रेवती को फोन दे दिया। माँ बेटी बतला रही थी।  उधर रमेश जैसे स्वयं से बाते कर रहे थे।    रेवती, तीन भाइयों की इकलौती सबसे छोटी व लाडली बहन थी । गाँव अत्यंत पिछड़ा … Read more

कब ग़ैरअपने बन जाते पता ही नहीं चलता – रश्मि प्रकाश

सरला ताई अकेली बड़े से घर में रहती थी। पति बहुत पहले ही गुजर गये थे एक बेटा था वो विदेश में रहता था। अपने घर और जगह से इतना लगाव था कि वो लाख बोलने के बाद भी बेटे बहु के साथ रहने नहीं जाती हर बार यह कहती जब तक हाथ पैर चल … Read more

ऋण – स्मिता सिंह चौहान

यार सुमी और कितना वक्त लगेगा, हमारा दूर का सफर है देर हो जायेगी ।जरा बोलो ना विशाल से (सुमि का भाई)थोड़ा पंडित जी को बोले जल्दी करें ।बरसी ही तो है, अब पापाजी दुनिया से चले गये ,अब वो कौन सा देख रहे हैं कि हम उनहे क्या दे रहे हैं क्या नही ?”शुभम् … Read more

 वसीयत – बेला पुनिवाला

    हां, तो दोस्तों, आज मैं आपको एक ऐसी कहानी सुनाने जा रही हूँ, जिसने अपने बेटी और बेटों में फ़र्क ना किया, लोगो की बातों को अनदेखा कर अपनी बेटी को भी वही हक़ दिए, जो एक बेटे को मिलते है, अब आगे…             एक गांव में किशोरीलाल का परिवार रहता था, जो गांव के बड़े … Read more

ऊप्स मोमेंट – स्मिता सिंह चौहान

कैसी रही तुम्हारी पार्टी? मजा आया।”शैफाली ने रिया (बेटी)से पूछा। “हां बहुत मजा आया ,बस थोड़ा निया का मूड ऑफ हो गया। बेचारी बहुत इमबैरेस सी हो गयी। इतनी सुन्दर लग रही थी उस पर वो ड्रेस लेकिन….”रिया ने अपना कोर्ट उतारते हुए कहा। “क्या हो गया ?सब ठीक तो है।”शैफाली ने रिया के हाथ … Read more

 बरनाली  – पूजा मनोज अग्रवाल

आज दुर्गा पूजा है ,बंगाल के हर घर मे यह दिन विशेष महत्व रखता है ,,,हमारी कहानी की मुख्य किरदार प्रियंवदा जी भी माँ दुर्गा की अनन्य भक्त है । तो वे भी आज के दिन अपनी बहू रितुपर्णा के साथ अपनी अराध्य मां दुर्गा को  पुष्प अर्पित करने जा रही हैं । प्रियंवदा जी … Read more

बिजनेस –  स्मिता सिंह चौहान

ट्रेन स्टेशन पर रूकी तो माधव ने चाय वाले को चाय देने का,इशारा किया ।”5 रूपये हुए।”वह बोला। “हाँ, हाँ, एक मिनट “जेब में से निकले 10के नोट को आगे बढाता हुआ, बचे पैसे रख लेने का इशारा करते हुए ।वही स्टेशन में उतर गया।सामने एक बेंच में बैठते हुए, आधी चाय वही रख दी,जैसे … Read more

खिलती कली – दीप्ति सिंह

बेटे की आया आशा के आने में अभी देर थी अत: डॉ अनुपमा अपने छह माह के बेटे का दूध लेने रसोई में खुद आई  तो चकित हुई। ….नाम ही शान्ति है उसका ;लेकिन आते ही घर चहकने लगता है उसके हाथ के बने खाने मे स्वाद भी है पर आज चुपचाप उतरे मन से … Read more

बेटी….!! – विनोद सिन्हा

“कहते है इंसान की ज़िंदगी तभी शुरू हो जाती है जब वह जन्म लेता है पर सच कहूँ तो मेरी जिंदगी तब शुरू हुई जब मेरे घर आँगन में मेरी बेटी ” समृद्धि” जिसे हम सब “छवि ” के नाम से पुकारते हैं ने जन्म लिया.! ! बेटी…क्या कहूँ इसके बारे में…!! क्या है बेटी … Read more

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