इंसानियत की मिसाल – संगीता अग्रवाल

” आदित्य !” बाहर से घर में घुसी नीता अपने सामने का नज़ारा देख हैरत और गुस्से से चिल्ला पड़ी ।  ” मम्मा …!!” मां को सामने देख आदित्य ने अपने नीचे दबोची नन्ही वसुधा को छोड़ा और भाग खड़ा हुआ ।  “रुक जाओ आदित्य !” नीता फिर चिल्लाई पर आदित्य तो तीर से छूटे … Read more

आधुनिक परिवार – कमलेश राणा

सुमन ने जब ब्याह के बाद अपने ससुराल की चौखट पर कदम रखा था, तो भीतर ही भीतर उसके मन में कई तरह की आशंकाएँ थीं। वह अपने मायके में जैसी पली-बढ़ी थी, वहाँ नियम-कायदे बहुत थे—कौन कहाँ जाएगा, कितनी देर रुकेगा, क्या पहनेगा, किससे बात करेगा, इन सब पर घर के बड़े नज़र रखते … Read more

इंसानियत – नीलम गुप्ता

स्वार्थ भाव से ऊपर उठकर सब के प्रति सहानुभूति पूर्ण व्यवहार करना इंसानियत का आधार है ।एक इंसान दूसरे इंसान को इंसान समझे, उसके सुख-दुख में साथ दें ,उसकी खुशी में खुश हो और गम में दुखी हो यही तो इंसानियत है ।इंसानियत कोई बहुत महानता या अभिमान की विषय वस्तु नहीं है । यह … Read more

भाभी हो तो ऐसी – आरती शुक्ला

सूरज की शादी में अब बस तीन हफ्ते रह गए थे। घर में हलचल थी—कभी टेंट वाले की बात, कभी कार्ड का डिजाइन, कभी मेहमानों की लिस्ट। लेकिन सूरज के मन में एक खालीपन था जो किसी लिस्ट से नहीं भरता। वह रात को देर तक जागता, और सुबह उठते ही अपने माथे की शिकन … Read more

बहू जितना होगा उतना ही कर सकती हूँ… – रश्मि प्रकाश 

“ क्या हुआ मम्मी जी आज आपने डिनर नहीं बनाया… और कृष के कपड़े भी नहीं बदले… जबकि कितनी बार कहा है… दिन भर में इसके कपड़े बदलते रहिए…. ।” अपने बेटे को सुबह के कपड़े में ही देख नताशा सासु माँ दमयंती जी पर बरस रही थी  “ बहू आज सुबह ही मन अच्छा … Read more

इंसानियत – डाॅ संजु झा

संसार में इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं है। ‘मानवता परमो धर्म:’हिन्दू सनातन धर्म का आधार है।भारत की सभ्यता और संस्कृति मानवता का उद्गम स्रोत है। इंसानियत के नाते हमारे ऋषियों ने महान-से-महान त्याग किया है।ऋषि दधीचि ने तो अपनी अस्थियाॅं तक दान कर दी थी। आधुनिक समय में भी इतिहास में कुछ ऐसे मनुष्य … Read more

अपमान का दर्द – गरिमा चौधरी 

“देखा, सुधीर… वही लोग… जिनके लिए मैं कभी ‘कम पढ़ी-लिखी’, ‘कम हैसियत वाली’, ‘बस पापड़ बेलने वाली’ थी… आज मुझे ‘बड़ी दीदी’ कहकर ऐसे लिपट रहे थे, जैसे बरसों की ममता उमड़ आई हो।” गीली आँखों के साथ गौरी ने कमरे की दीवार पर टंगी अपने पति सुधीर की तस्वीर से कहा। तस्वीर में सुधीर … Read more

इंसानियत – डॉ. आशा

नवरात्रि के आख़िरी दिनों में मोहल्ले की गलियाँ अपने आप में एक अलग ही रंग ओढ़ लेती थीं। कहीं मंदिर से घंटियों की मधुर आवाज़ आती, कहीं लाउडस्पीकर पर “जय अम्बे गौरी…” गूंजता, और कहीं घरों के आँगन में रंगोली के बीच दिए टिमटिमाते दिखते। दुर्गा नवमी का दिन था—वही दिन जब हर घर में … Read more

असहाय नहीं हूं मैं – नीलम गुप्ता

वह मेरे घर में साफ सफाई का काम करती थी ।लंबी छरहरी ,गोरा रंग ,किसी दिन अच्छी सी साड़ी पहन कर आती तो लगता किसी संभ्रांत घर की बहू बेटी है । तीन बेटे हैं उसके बड़े दोनों तो 22 और 24 साल के हैं दोनों पढ़ लिखकर नौकरी पर लग गए हैं ।छोटा अभी … Read more

इंसानियत – परमा दत्त झा

आज दुखन पर पंचायत बैठा था।कारण दुखन श्वसुर होकर बहू का हाथ पकड़ा और गोद में उठा कर—! मधुबनी जिले का वह सोनवर्षा गांव जहां करीब चालीस घर मंडल परिवार है उसी में एक दुखन मंडल का घर है। पूरा भगवान के कोप से शापित अभागा परिवार।दुखन दो भाई और सात बहनें सबसे बड़े भाई … Read more

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