खाने का डिब्बा – सीमा वर्णिका
नंदू दरवाजे की ओट से अम्मा बाबू की बातें सुन रहा था । “नंदू के बाबू तुम एक खाने का डब्बा ..काहे नांहि लै लेत ..रोज खाना लिये बिगैर काम पर जात हौ “अम्मा कह रही थीं। ” अरे काहे पाछै परी रहती हो.. घरै से खाके तो जात हैं,” बाबू ने जवाब दिया । … Read more