वक्त का क्या भरोसा – रश्मि प्रकाश

मनीष गर्मी की छुट्टियों में अपने परिवार के साथ शिमला घूमने गया था।  शिमला से जब वापस दिल्ली लौट रहे थे अचानक उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई।  इस दुर्घटना में मनीष की मौके पर ही मौत हो गई।  लेकिन उसकी पत्नी राधा और दोनों बच्चों को  मामूली चोटें आई थी। राधा ने  इस मुश्किल घड़ी … Read more

शब्दों के तीर, प्रभु के ह्रदय को गये चीर, – सुषमा यादव

एक बिल्कुल सत्य कहानी लेकर मैं आप की सेवा में फिर से हाजिर नाजिर हुई हूं,, आप की प्यारी प्रतिक्रया का हमेशा की तरह बेसब्री से इंतज़ार रहेगा, धन्यवाद कभी भी क्रोध में विवेक खोकर किसी को भी अपशब्द अपमान रूपी तीर से घायल मत करिए,, बोलने वाला, सुनने वाला भी कुछ दिन में भूल … Read more

अधूरी ख़्वाहिश – कामेश्वरी करी

जानकी पाँच बजे ही उठ गई ।बाहर आकर घर के सामने रंगोली डालने लगी ।उनके घर का रिवाज है कि रोज सबेरे घर के मुख्य दरवाज़े के सामने काम करने वाली बाई पानी छिड़क कर जाते ही रंगोली बनाना है ।यह रंगोली रोज जानकी ही बनाती है । संक्रांति के त्योहार के समय वह पूरे … Read more

स्वयं की तलाश – डा. मधु आंधीवाल

पंखुरी खिड़की में खड़ी थी । आज घनघोर बारिश हो रही  थी ।  उसके साथ ही उसके मन में भी  अंधेरी घटायें घिरी थी । सोच रही ऐसी ही तो बारिश की शाम थी । वह बस का इन्तजार कर रही थी । आज प्रेक्टीकल क्लास देर से छूटी । वह अकेली रह गयी उसकी … Read more

बरसात की वो रात – पुष्पा पाण्डेय

मंदिर में रात बीताने को मजबूर मास्टर  दम्पति को  नींद नहीं आ रही थी। तूफानी बरसात, कड़कते बादल और चमकती दामिनी ने उन्हें गाँव जाने से रोक दिया था। एक मित्र की पत्नी का देहान्त हो गया था। उसी के दुख में शामिल होने गये थे। आना तो कल सुबह चाहते थे, लेकिन किसी ने … Read more

रिटायर्ड आदमी की आत्मकथा – सत्य प्रकाश श्रीवास्तव

आप सोच रहे होंगे, “इस आदमी को बेहद खुशनसीब होना चाहिए। साठ साल तक सरकारी माल काटने के बाद अब नाती- पोतों के साथ जीवन का आनंद लेते दिखना चाहिए था। बेटे-बहुओं की हथेली पर इस आदमी के नखरे कुलांचे भरते दिखने थे। पर, यहां ये आदमी इस उम्र में..! ये तो दया का पात्र … Read more

आया सावन झूम के – अनुज सारस्वत

“चलो भाई टाईम हो गया आफिस का निकलो कि यहीं बसेरा डालना “ हमारे साथी ने साढ़े पाँच किलो वजनी हाथ हमारे नाजुक से कंधो के सारे तंतू हिलाते हुए कहा ,इधर हमारा कंधा पीसा की मीनार से चार अक्षांश पर झुका और हमारे चेहरे अंदर के क्रोध को बाहर आने से रोकने के लिये … Read more

हरियाली अमावस्या की वह काली रात” – अनिता गुप्ता

सावन के आतें ही मुझको अमावस्या की उस  घनी काली रात की याद आ जाती है। जो पतिदेव और मैंने दहशत में काटी थी। सावन की रातों में चन्द्र दर्शन कम ही होते है , क्यों कि काले – काले बादल चन्द्रमा को अपने आगोश में ले लेते हैं। इसलिए रातें अंधेरी होती है  और … Read more

वो कौन थी – कमलेश राणा

हमारा रोज का नियम था कि रात को काम निपटाने के बाद सारी बहुएं सासू माँ के पास जरूर कुछ देर के लिए बैठते थे,, सारे दिन में यही ऐसा वक़्त होता था जब सारी महिलाएं और बच्चे साथ फ्री हो कर  बैठते,,दुनियां जहान की बातें होतीं और सासू माँ बहुत सारे संस्मरण हमें सुनातीं,, … Read more

मुखौटा – अंजू निगम

कल बाजार जाना हुआ तो सोचा अपनी पूरानी सखी से भी मेल-मुलाकात कर लूँ|अरसा हो गया था उससे मिले |कई बार उलहाने दे चुकी थी,सोचा आज जाकर उसे चौंका दूँ| घर गयी तो नौकर ने दरवाजा खोला|अंदर अच्छी-खासी रौनक जमी थी|शायद कोई पार्टी चल रही थी|१०-१५ महिलाएं जुटी थी|पहनावे से रईसी झलकती| उन्हें देख अंदर … Read more

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