रिम झिम गिरे सावन – किरण केशरे
सुबह से रह रह कर बरसात हो रही थी, कभी तेज झड़ी तो कभी पानी की बरसती टप टप करती बूँदे,,,चारों तरफ सुहावना मौसम हो रहा था, दोपहर होने को आई, मैं बालकनी में झूले पर हाथ में भुट्टा लिए बैठी गुनगुनाते हुए शेखर के बाजार से आने का बेसब्री से इंतजार कर रही थी। … Read more