बहू/बेटी / सास/माँ – गीतांजलि गुप्ता

थोड़ी देर को बाहर ले चलो सिस्टर कमरे में पड़े पड़े मन घबरा गया है। शालू सिस्टर से कह रही थी पर सिस्टर सुना अनसुना कर कमरे से निकल गई। महीने भर से शालू अस्पताल में दाखिल है। उस का भाई मानव कभी कभी मिलाई के समय आ जाता है औपचारिक मुलाकात होती है। ठीक … Read more

प्रसाद – दीप्ति सिंह

राशि का गोलमटोल बेटा शुभ जब से घुटने चलने लगा है माँ को खूब दौड़ाता है गिरी हुई वस्तुओं को नियत स्थान पर रखते -रखते राशि थक जाती है कभी कभार तो भोजन करना भी दूभर हो जाता है। “राशि …राशि ”  की आवाज लगाते हुए मकान मालकिन रचना ऊपर आयी।  “क्या बात है दीदी … Read more

थैंक्यू आंटी – नीरजा कृष्णा

मालिनी और भुवन जी को अचानक किसी कार्य के लिए मुंबई आना पड़ा था…होटल ताज़ में तीन दिनों के लिए बेटे ने बुकिंग भी करा दी थी…सब कुछ बहुत जल्दबाजी में हुआ था…वो लोग जब ताज़ में पहुँचे ….उनको लाउंज में थोड़ा वेट करने को कहा गया… वो एकदम आपा खो बैठी,”ये क्या नॉनसेंस है…अभी … Read more

मोहतृष्णा – विनोद सांखला

रात के 11:30 बज चुके थे..सिलेबस से कल की ऑनलाइन क्लासेस का मटेरियल निकाल ही रही थी कि पास रखे मोबाइल में व्हाट्सएप पर तन्मय का मैसेज चमका। ★ ” सरप्राइईईईज…मैं आपके शहर में आ गया..” पढ़कर मेरी खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा.. तुरंत मैंने भी रिप्लाई किया.. ” इतना खतरनाक सरप्राइज..?? आश्चर्य से. … Read more

डस्टबिन – नीरजा कृष्णा

सुधांशु जी के घर में आज खूब रौनक है। तीन बेटों के विवाह के बाद आज उनकी इकलौती बिटिया निशा की बारात आने वाली है। उनके इतने बड़े बंगले में ही विवाह का आयोजन होने जा रहा है। वरपक्ष की इच्छानुसार एकदम देशी खाने पीने की व्यवस्था हो रही है। आँगन के एक कोने में … Read more

ख़्वाहिशों का कोना इस मन के अंदर भी है – रश्मि प्रकाश

“कभी कभी प्यार से भरा मन भी रिक्त होता है.. हमारे पास सुख सुविधा की हर चीज उपलब्ध होती हैं फिर भी हमारे मन का एक कोना जाने क्यों खाली खाली सा रह जाता। जानती है मैं कितनी खुश रहा करती थीं पर अब चिड़चिड़ी सी रहने लगी हूं।मेरा मन नहीं करता अब कही भी … Read more

” मेरे भैया ” – रणजीत सिंह भाटिया

 सरला जो की अनाथ आश्रम में पली थी l  रजत ने उससे शादी की इसलिए घर वाले उससे बहुत नाराज थे l कॉलोनी वाले सब सरला को भाभी कहते थे l एक तीन साल का प्यारा सा बेटा था सरला अपनी छोटी सी गृहस्थी मैं बहुत खुश थी l अपने आंगन में फूल सब्जियां उगाती, … Read more

 साजन घर आए  – अनिता गुप्ता

भानू प्रताप सिंह के घर से लेकर बाहर मोहल्ले तक फूलों से सजावट हो रही थी। जगह – जगह फूलों के दरवाज़े बने थे और भानु प्रताप सिंह जिंदाबाद लिखा था। बैंड वाले स्वागत धुन बजा रहे थे। पूरा मोहल्ला ठसाठस लोगों की भीड़ से भरा हुआ था। मोहल्ले के बाहर भी बहुत लोग जमा … Read more

सगे भाई का फर्ज – अनामिका मिश्रा 

सविता के दो बच्चे थे और उसके पति छोटी-मोटी नौकरी करते थे। वो एक स्कूल में शिक्षिका थी।  छोटे बच्चों को पढ़ाया करती थी।  सविता बहुत ही मिलनसार स्वभाव की थी सब स्कूल में उसे पसंद करते थे। एक दिन प्रधानाध्यापक ने किसी स्टाफ से पूछा, “मोहन, क्या बात है चार दिनों से सविता नहीं … Read more

*राखी* – नम्रता सरन”सोना”

हर वर्ष की तरह रागिनी ने इस बार भी रक्षाबंधन की तैयारी कर रखी थी… अपने भाई के लिए सुंदर सी राखी… भाभी के लिए कंगन और साड़ी.. नारियल… रुमाल…घेवर…फ़ैनी…और भी बहुत कुछ… जो भी उसे याद आया..एक एक चीज़ बड़े ही प्यार से संजोई थी…कि जब भाई राखी बंधवाने आए तो कोई कोर कसर … Read more

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