पेट – विनय कुमार मिश्रा
दुकान बंद करने का समय हो आया था। तभी दो औरतें और आ गईं “भैया साड़ियां दिखा देना कॉटन की, चुनरी प्रिंट में” आज मेरी खुशी का ठिकाना नहीं है।आज पाँच महीने हो गए हैं, अपनी ये छोटी सी दुकान खोले। आज से पहले कभी ऐसा नहीं हुआ। आज सुबह से दस पंद्रह कस्टमर आ … Read more