बाकी सब ठीक है* – नम्रता सरन”सोना
“चिट्ठी…”अचानक पोस्टममेन की आवाज़ से दरवाज़े की तरफ दौड़ पड़ी शालिनी, एक अजीब सा चुंबकीय बुलावा था जैसे, लिफाफा उठाकर देखा, इंश्योरेंस कंपनी का अपडेट था, भारी मन से शालिनी भीतर आ गई, लेकिन आंखों के सामने बीते कुछ चित्र तैर गए। “चिट्ठी…” शालिनी बेतहाशा दौड़ती हुई दरवाजे पर पहूंची। “ये ले बिटिया, तेरी चिट्ठी, … Read more