पड़ोस भी परिवार है – डॉ. पारुल अग्रवाल

आजकल नौकरी की वजह से ज्यादातर युवा लोग अपने परिवार से दूर दूसरे शहर में रहते हैं।अधिकतर नौकरियां कंप्यूटर से संबंधित होती हैं तो ज्यादातर नवयुगल शादी के बाद रहने के लिए अपना आशियाना भी इन्हीं शहर में सोसायटी में ही बनाते हैं। वैसे भी महानगरों में मौहल्ले वाली संस्कृति खत्म हो रही है। ऐसी … Read more

 एक खुश तो सब खुश  – गुरविंदर टूटेजा 

संचित आज बहुत उदास था…कुछ दिन पहले ही उसकी दादी का निधन हो गया था और वो उसे बहुत प्यार करती थी वो भी अपनी दादी के बिना नहीं  रहता था…!!!!    दस दिन बाद दीवाली का त्यौहार आने वाला था…सबकों पता था इस बार दीवाली नहीं मनेगीं घर में…फिर भी संचित पापा से बोला कि … Read more

माँ ! तिन्नी रो रही है।’ – पुष्पा जोशी

‘रो रही है, तो मैं क्या करूँ? उसकी माँ है ना उसे सम्हालने के लिए।’  ‘माँ ! वह भूखी है, चाची की तबियत ठीक नहीं है।’ ‘ठीक नहीं है तो? मैंने ठेका नहीं लिया है सबका।’ सुनंदा उग्र स्वभाव की महिला थी, और मन में दांव – पेंच रखती थी। दुष्ट प्रकृति की थी, और … Read more

बहू, तुम तो आदमियों जैसे खाती हो! – राशि रस्तोगी 

लीला अपने घर में सबसे छोटी थी और पूरे परिवार की लाडली | लीला के पिता गांव के बड़े ज़मीनदार थे, बहुत ही धनाढ्य व्यक्ति थे | यूँ तो घर में नौकरो की कमी ना थी, पर पुराने रीति रीवाज़ो के हिसाब से घर का खाना घर की महिलाये ही बनाती थी | लीला ने … Read more

परिवार का साथ ख़ुशियाँ लेकर आता है – के कामेश्वरी 

रामकिशन शहर के नामी वकील थे । लोगों की सोच यह है कि उनके हाथ में गया हुआ केस कभी हार नहीं सकता है । इसलिए वे हमेशा व्यस्त रहते थे । उनके बारह बच्चे थे ।जी उस समय भगवान की देन कहते हुए बच्चों को पैदा किया जाता था और यह भी कहा जाता … Read more

अयोध्या – अनुज सारस्वत

रामजी बनवास में थे रावण का अंत हो चुका था पर इधर अयोध्यवासियों में किसी को कुछ नही पता था। नगर में एक कुटिया में एक वृद्ध और उसकी बेटी रहते थे।घास फूस की  कुटिया थी।जमीन पर वृद्ध लेटा हुआ था कुटिया के कोने में दीपक को निहारते हुए उसकी आँखो से झर झर आँसू … Read more

जड़ें बुलाती हैं – आभा अदीब राज़दान

“ सुनील क्या बात है, कुछ दिनों से देख रही हूँ बहुत सुस्त दिखाई दे रहे हो । ऑफिस में कोई इश्यू है क्या ।” सुनैना ने पति के बालों में अपनी उँगलियाँ फिराते हुए पूछा । “ आय एम गुड नथिंग टु वरी … ऐसी कोई बात नहीं सब ठीक है यार ।” सुनील … Read more

दिए की कीमत – संजय मृदुल

“सुनो! कैसे दिए भैया दिया।” “बीस के दस।” मुस्कुरा कर जवाब दिया उसने। “अरे!इतने महंगे?” उनकी आंखें फैल कर बड़ी हो गयी। “क्या करें बहनजी। सब कुछ तक महंगा हो गया है।” “तो! इसका क्या मतलब? कौन सा मिट्टी खरीदनी पड़ती है तुम्हें। मुफ्त की मिट्टी मुफ्त का पानी। फिर भी इतना महंगा बेचते हो।” … Read more

प्रवंचना – सुनीता मिश्रा

“दीदी ,जयमाल के लिये मेरे लह्ँगे का कितना खराब कलर पसंद किया आपने और सस्ता भी।आपको तो पता है नकुल की पसंद कितनी शानदार है।” योगिनी की छोटी बहिन रागिनी ने अपनी  शादी के लिये कपड़ों में एतराज जताया।बी एस सी करने के बाद उसकी शादी उसके पसंद के लड़के से  तय हो गई थी।दो … Read more

“परिवार का बंटवारा” – अनीता चेची : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi : शोभा आज फूली नहीं समा रही थी। आज उसके उससे 16 वर्ष छोटे देवर रमन की शादी जो है। हमेशा अपने बेटे के रूप में अपने देवर को देखा। रमन का बड़ा भाई जगन अपने छोटे भाई को घोड़ी पर चढ़ते हुए देख कर उसके बचपन को याद कर सोचने … Read more

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