किस्मत का अनोखा खेल – डॉ. पारुल अग्रवाल
नन्ही सी फ्रॉक पहनकर घूमने वाली कृति,आज दुल्हन के लिबास में सजी धजी ऐसे लग रही थी कि जैसे कोई अप्सरा उतर आई हो। संध्या की तो जैसे जान बसती थी उसमें, विदाई के समय मां-बेटी का एक दूसरे से अलग होते हुए बुरा हाल था। पर कहते हैं ना कि ये विदाई ऐसी विदाई … Read more