कर्मों का चक्र – विक्रम की कहानी – डॉ. स्नेहा नीलेश निंबालकर

विक्रम एक बड़े शहर में बिज़नेस करता था। शुरूआत में वह मेहनत से काम करता था, लेकिन जैसे-जैसे पैसा और ताक़त उसके हाथ आई, उसकी नीयत बदलने लगी। वह ठेके लेने के लिए रिश्वत देता, नकली कागज़ बनवाता और घटिया माल बेचकर लाखों रुपए कमाता। धीरे-धीरे उसने और भी बुरे काम शुरू कर दिए—लोगों से … Read more

आपे से बाहर होना – हेमलता गुप्ता

जवान बेटी पर हाथ उठाते शर्म नहीं आ रही हो क्या गया है तुम्हें किस बात पर इतना गुस्सा आ रहा है मुझे भी तो बताओ.. मानसी के कहने पर रमेश जी ने अपना आपा और खो दिया और वह चिढ़कर बोले… यह सब तुम्हारी शह की वजह से हो रहा है तुमने इतनी छूट … Read more

दीदी , आपने अपना रिटायरमेंट अपने हाथों से बिगाड़ दिया !! – स्वाती जैंन

अरे बहू , क्या खीं – खीं करके दाँत दिखाके हंसे जा रही हो , इतना भी नहीं जानती कि अभी शादी करके महिना भर ही हुआ हैं तुमको ?? अपने ससुराल वालों के साथ बात करते समय लज्जा – शर्म होनी चाहिए यह भी नहीं सिखाया क्या तुम्हारी मां ने तुमको ?? सरोज जी … Read more

आपे से बाहर होना – लक्ष्मी त्यागी

सलोनी मध्यवर्गीय परिवार से थी , उसने अपने माता-पिता को बचपन से ही संघर्ष करते देखा था। वह भी उनका हाथ बटा देना चाहती थी। किसी तरह उसने स्नातक की परीक्षा दी और नौकरी करने लगी। ऐसा नहीं कि सलोनी शांत स्वभाव की थी बल्कि उसने अपने जीवन में,अपने आपको,छोटे बहन -भाई को छोटी-छोटी जरूरत … Read more

कर्ज की बेदी – डॉ बीना कुण्डलिया

राधे मोहन जी परेशान से घर में चहलकदमी कर रहे। हफ्ते भर से उनका यही हाल आँखों से नींद गायब एक माह बाद बेटी की शादी तय हुई कपड़े गहने लतते पंडाल होटल सभी मिलाकर काफी खर्चा होने वाला कैसे होगा सब ? पैसा तो कम पड़ जायेगा । कर्ज तो लेना ही पड़ेगा । … Read more

कुछ तो लोग कहेंगे – के आर अमित

हांजी भैया जी आपकी एक किलो चीनी हो गयी और दूध का पैकेट भी डाल दिया। बोलो तो ये कपड़े धोने का साबुन दे दूं नया आया है बहुत बढ़िया क्वालिटी है आपका काम आसान हो जाएगा। मेरा काम आसान हो जाएगा मतलब?? अरे भैया जी अब इसमें छुपाने की क्या बात है पूरा मोहल्ला … Read more

बंद खिड़कियां – लतिका श्रीवास्तव

खूबसूरत शहर शानदार सड़कें सड़कों के किनारे विशाल अट्टालिकाएं उन्हीं में दड़बेनुमा फ्लैट्स में रहते परिवार । व्यस्तता की आंधी में गोते लगाते धनोपार्जन के चक्रवात में गिरते संभलते जीवन को जीने के यत्न करते परिवार। ऐसे ही एक मोहल्ले में रहने आई थी मधु । अकेले ही रह रही थी वह अपनी मंजिल के … Read more

शादी का लहंगा – श्वेता अग्रवाल

पलक की शादी पक्की हो गई थी। घर में खुशी का माहौल था। लड़के वालों ने उसे पहली बार में ही पसंद कर लिया था। पलक के चेहरे पर वह खुशी साफ झलक रही थी जो किसी भी लड़की के मन में शादी तय होते ही आ जाती है। उसका ज्यादातर समय अब फोन पर … Read more

लोग क्या कहेंगे – कमलेश राणा

सुनो जी.. सुबह ऋतु का फोन आया था आज फिर उनके घर में क्लेश हुआ है। मैं तो रोज – रोज यही बातें सुनकर थक गई हूं। बेटी को समझाओ कि तुम उनके हिसाब से एडजेस्ट करो तो वह आधी बात सुनने को तैयार नहीं है.. भुनभुना कर फोन पटक देती है, कहती है कि … Read more

दुनिया दो धारी तलवार – विमला गुगलानी

   “ बेटा , अब तुम कर ही लो शादी, कब तक मेरी बनाई कच्ची पक्की रोटी खाते रहोगे, दाल, सब्जी में भी कोई कीड़ा पक जाएगा, तो फिर न कहना, बहुत कम दिखता है मुझे, तेरी छोटी बहन मिष्ठी एक बच्ची की माँ भी बन गई और तूं अभी तक कुवाँरा, अब तो मुहल्ले वाले … Read more

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