कुछ तो लोग कहेंगे – डोली पाठक

बारह बरसों तक सूनी कोख लिए सरोज अपनी ममता लूटाने को तरसती रही….  हर मंदिर और हर देश प्रतिमा के आगे अपने कोख के गुलजार होने की अनसुनी सी प्राथनाएं कर के रख चुकी सरोज ने जान लिया था कि ईश्वर ने शायद उसके भाग्य में ये सुख दिया हीं नहीं था… उसकी गोद भले … Read more

आपे से बाहर होना – निमिषा गोस्वामी

शालू ऊ ऊ ऊ ऊ तुमने इन बच्चों को मेरे कमरे में कैसे आने दिया। निकालो इन्हें बाहर।सारा कमरा बिखरा दिया। वैभव अपने कमरे को बिखरा हुआ देखकर आपे से बाहर हो गया। वह ज़ोर से अपनी बीवी पर चिल्ला रहा था। शालू किचन में चाय बना रही थी। गैस बंद कर घबड़ाकर भागी।क्या हुआ … Read more

कुछ तो लोग कहेंगे – नीरज श्रीवास्तव

   कुछ तो लोग कहेंगे की हरिया पागल हो गया तो शायद कुछ कहेंगे कि हरिया भाग्यशाली था जो वह ऐसी घटना का साक्षी बना।          हरिया लखनपुर गाँव में रहता था। हरिया के परिवार में उसके अलावा और कोई न था क्योंकि हरिया के माँ-बाप तो बहुत पहले ही हैजा रूपी महामारी के शिकार हो … Read more

कुछ तो लोग कहेंगे – निमिषा गोस्वामी

एक ऐसे परिवार की कहानी जहां पर औरतों को अकेले घर से बाहर निकलने की इजाज़त नहीं थी। चाहे वह बेटी हो या बहु। अमरनाथ का परिवार एक ऐसा ही परिवार है। संयुक्त परिवार होने के कारण घर के सबसे बड़े यानि कि अमरनाथ के पिता सिरोमणी जी का ही आदेश सर्वोपरि होता है। अमरनाथ … Read more

कडवी जुबान – परमा दत्त झा

आज बृजेश मिश्र को श्रेष्ठ कलाकार के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। सम्मान समारोह में उन्हें पांच लाख नकद राशि, एक स्वर्ण पदक सहित समान से सम्मानित किया गया है।उसके बाद खुशी से चहकता फोटो था। अब काटो तो खून नहीं -बिटटी सारा कुछ हड़पकर रानी बनी बैठी है और हम उनकी औलाद ठोकर … Read more

लिव इन रिलेशन – शिव कुमारी शुक्ला

सुबह के नौ बजे थे अंजु और  रोहन अभी भी अलसाये बेडरूम में पड़े थे।एक दूसरे का साथ छोड़ कर उठने की इच्छा ही नहीं हो रही थी। तभी डोरवेल बजी।अंजु उठी दरवाजा खोलने के लिए । रोहन बोला यार ये सुबह सुबह ही कौन आ गया रंग में भंग डालने। अंजु देखती हूं कहती … Read more

भाभी की बेटी तो फ्री की नौकरानी हैं !! – स्वाती जैंन

इस अनाथ को तू यहां अपने घर क्यों ले आई हैं , मेरे घर को अनाथाश्रम समझ के रखा हैं क्या ?? तेरे भाई की बेटी की इस घर में कोई जगह नहीं समझी , तेरे गरीब मायके वाले तुझे ही मुबारक , मैं कह देती हुं कि इसे जहां से लाई हैं , वहीं … Read more

ताना – विनीता महक गोण्डवी

अरे देखो देखो कितनी निर्लज्ज है। अभी ससुर को मरे हुए कुछ ही दिन हुए हैं और कैसे बाहर घूम रही है। कुछ दिन से देख रहे हैं कि संतलाल भईया की बहू के सिर पर पल्ला भी नहीं रहता ।न जाने गाड़ी में पुरुषों के साथ कहां कहां जाती हैं। कभी सुबह कभी शाम … Read more

कर्मों का चक्र तो चलता ही रहता है – सोनिया अग्रवाल

आज सुरभि को मायके लौटे हुए पूरे 25 दिन बीत गए थे , मगर अजय को न उसकी परवाह कल थी और न ही आज। कहते है न परवाह भी इंसान उसी की करता है जिसकी उसे जरूरत होती है , उस से प्यार होता है। मगर जब अजय की जिंदगी में पहले से ही … Read more

लोग क्या कहेंगे छोड़ो,बच्चों की खुशी का सोचो – कमलेश आहूजा

“माँ,बंद करो अपना ये नाटक और जल्दी से तैयार हो जाओ।मैंने नेहा के घरवालों को आज होटल में मिलने के लिए कहा है।”रोहित सुषमा पर गुस्सा होते हुए बोला। नेहा रोहित के ही ऑफिस में काम करती थी।रोहित की ही तरह उसने भी बी ई व एम बी ए किया था।देखने में सुंदर थी।परिवार भी … Read more

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