दुलारी सिम्मी – माता प्रसाद दुबे
नन्ही सी बच्ची को गोद मे लिए सिम्मी एक कोने मे चुपचाप बैठी अपने अतीत के बारे मे सोच रही थी।”क्या ये वही घर है..वही लोग है..जहा वह सबकी आंख का तारा थी..वह उदास होती थी तो पूरा घर परेशान हो जाता था..वह हंसती थी तो सभी खिल-खिलाकर हंसते थे..पर आज उसके पास न कोई … Read more