अब और नहीं -सुधा शर्मा
रानी स्तब्ध रह गई थी , सामने फिर वही दृश्य उभरने लगे थे बरसों पहले के, शरीर जैसे निष्प्राण हो गया था । उसकी देवरानी शीला की हृदय विदारक चीत्कारे दिल दहला रही थीं ।रानी जैसे जड बनी , पत्थर के बुत सी बैठी थी । गौना हो कर चार दिन पहले ही तो आई … Read more