संस्कारो का दहेज – मंगला श्रीवास्तव
सुबह के पाचँ बजे थे। अम्माजी उठ चुकी थी । चाहे कितनी ठंड हो या गर्मी वह इसी समय उठ जाती है रोज।कमरे से बाहर आकर उन्होंने अपनी छोटी बहू को आवाज दी नीरा ओ नीरा मेरी चाय बन गयी क्या ,जी मांजी कहकर नीरा ने जल्दी से चाय लाकर टेबल पर रख दी । … Read more