अपने अपने संस्कार – निभा राजीव “निर्वी”

आज बड़े दिनों के बाद निधि की बचपन की सहेली विनीता उससे मिलने आई थी। यूं तो दोनों एक ही शहर में रहते थे मगर कामकाजी होने के कारण व्यस्तता इतनी हो जाती थी कि मिलना कभी-कभार ही हो पाता था। निधि ने बड़े मन से विनीता के पसंद का बेसन का हलवा बनाया था … Read more

चंद्रमुखी – भगवती सक्सेना गौड़

आज चंद्रमुखी 65 वर्षीय महिला, अपने किरायेदार विक्की बाबू के साथ बैंक जा रही थी, वर्ष में एक बार लाइफ सर्टिफिकेट के लिए जरूरी होता है जाना। तिमंजले घर मे चार किरायेदारों के परिवार के साथ अकेली ही जीवन बीता रही हैं। सुबह 11 बजे बैंक पहुँच गयी। पूछताछ करने के बाद एक युवक अपने … Read more

रिश्ते -परीक्षा /प्रतियोगिता ?? – ज्योति अप्रतिम

धूमधाम से शादी हो गई । जेठानी और देवरानी  दोनों की बहुएं एकसाथ रुनझुन करती अपने घर में आ गईं। करीब – करीब सभी मेहमान विदा ले चुके थे पर घर की सभी बहन बेटियां अभी यहीं थीं। आज बहुओं की पहली रसोई थी ।एक बहू सूजी का हलवा बना रही थी औऱ दूसरी चावल … Read more

‘ अन्न का आदर करना भी संस्कार है ‘ – विभा गुप्ता

 मेरे पति के बाॅस की पत्नी हमेशा अपना और अपने बच्चों की बड़ाई करतीं और मेरे बच्चों को नीचा दिखाने की कोशिश करती रहतीं थीं।         एक दिन उन्होंने हमें अपनी शादी की सालगिरह पर डिनर के लिए इन्वाइट किया।डिनर शहर के नामी रेस्तरां में था।इच्छा न होते हुए भी मुझे वहाँ जाना पड़ा।           एक टेबल … Read more

दूसरी तनख्वाह – कंचन श्रीवास्तव

प्रभात उठो न कितनी देर हो गई देखो न दिन चढ़ आया। बच्चों को छोड़ना है दूध लाना है,और तुम्हें ताज़ी सब्जियां खाने का शौक है तो उन्हें भी लाना है। फिर कहीं जाके दफ्तर जा पाओगे, कहती हुई बालों में उंगली फेरती सुधा धीरे से बिल से उठी और सीधे बाथरूम में चली गई। … Read more

संस्कार तो बेटे को भी देने पड़ते हैं। – अर्चना खंडेलवाल

“मुझे उम्मीद नहीं थी सात साल बाद ऐसा कुछ होगा!!! अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था सामने प्राची को देखकर लग रहा था कि दुनिया बहुत ही छोटी है सोना कभी प्राची से फिर से मिलेगी ऐसा सोना ने सपने में भी नहीं सोचा था। जो रिश्ते संज्ञाहीन और भावशून्य हो जाये उन … Read more

सोने का पिंजरा – रश्मि प्रकाश

शीना के चेहरे पर कई भाव आ जा रहे थे…. तभी कमरे में सुमिता जी आ गई….“ क्या कर रही हो दोनों… सोई नहीं अब तक…. ।” कह कर वो भी वहीं बैठ गई शीना माँ को देखते उनके गले लग गई और बिलख पड़ी….ऐसा लग रहा था आज कई वर्षों बाद वह अपनी माँ … Read more

माँ मै आपका अपमान नही सह सकती – किरण विश्वकर्मा 

आज कई वर्षों बाद वह अपनी मां के सामने बिलख पड़ी…..  मां मै तुम्हारा अपमान कैसे सह लूँ….. मां मैं थक चुकी हूं अब और मुझसे सहन नहीं होता है फिर मेरी बात हो तो मैं बर्दाश्त भी कर लूं पर जब मां आपको कोई कुछ भी अपशब्द कहता है या फिर मेरी परवरिश पर … Read more

मां तो कभी बच्चों पर किए गए खर्च का हिसाब नहीं लगाती!! – अर्चना खंडेलवाल

मां, अकेले मेरी जिम्मेदारी नहीं है, महीना शुरू हुए इतने दिन हो गये और आपने अभी तक भी पैसे नहीं भेजे?? मैं ही अकेला मां का खर्चा क्यूं उठाऊं? अभी मेरे मकान का भी काम चल रहा है, अब मकान बनवाऊं या मां की बीमारी में पैसा खर्च करूं! मेरे पास भी कोई खजाना नहीं … Read more

काश मैंने बेटे की जगह पति और पिता बनकर फैसला लिया होता!! – संगीता अग्रवाल  

” माफ कीजिएगा मांजी आपकी बहु के मरी हुई संतान पैदा हुई है !” नर्स बाहर आ उमा जी से बोली। ” क्या ….और मेरी पत्नी कैसी है ?” उमा जी की बजाय उनके बेटे रक्षित ने पूछा। ” वो अभी बेहोश हैं असल में बच्चे की नॉर्मल डिलीवरी करवाने की चक्कर में उन्होंने पहले … Read more

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