मैंने ऐसा तो सोचा न था – के कामेश्वरी
भुवनेश्वर जी के दो लड़के थे । वे कपड़े बेचने का व्यवसाय करते थे । रोज सबेरे साइकिल पर कपड़ोंकी गठरी रखकर बेचते थे । छोटा बेटा पढ़ लिखकर शहर में ही नौकरी करने लगा था । बड़ा बेटाकल्याण ने डिग्री के बाद पिता के साथ ही काम करने का फ़ैसला कर लिया था । … Read more